पेंटागन का कहना है कि रूस के दो एसयू-27 लड़ाकू विमानों ने एमक्यू-9 रीपर ड्रोन पर ईंधन डाला था, जो काला सागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में एक नियमित निगरानी मिशन पर था।
अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में दावा किया है कि रूसी लड़ाकू विमानों ने 30 से 40 मिनट तक ड्रोन के सामने और चारो तरफ़ उड़ान भरी और फिर उनमें से एक ने ड्रोन के प्रोपेलर को टक्कर मार दी, जिसके बाद अमरीकी सेना ने इसे काला सागर के अंतरराष्ट्रीय पानी में डुबो दिया।
पेंटागन का यह भी दावा है कि यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस में अपनी नियमित उड़ान पर था, जब रूसी लड़ाकू विमानों ने इसे इंटरसेप्ट करने की कोशिश की।
हालांकि रूस के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रूसी विमानों ने ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने किसी तरह के हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया और वह अमरीकी ड्रोन के संपर्क में नहीं आए।
रूस ने पेंटागन के उस दावे को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें रूसी विमानों के अमरीकी ड्रोन के संपर्क में आने की बात कही गई थी। रूसी रक्षा मंत्रालय का यह भी कहना है कि एमक्यू-9 रीपर ड्रोन अपना ट्रांसपॉन्डर ऑफ़ करके उड़ान भर रहा था।
इस घटना के बाद, मंगलवार को अमरीकी विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन में रूस के राजदूत को तलब किया और अपनी आपत्ति दर्ज की।
अमरीकी विदेश मंत्रालय में तलब किए जाने के बाद, रूसी राजदूत अनातोली एंटानोव ने कहा कि यूरोप के पूर्वी हिस्से में जो कुछ चल रहा है, उसे ध्यान में रखते हुए हमें अपनी कार्यवाहियों को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
एमक्यू-9 रीपर एक विशाल मानवरहित एयरक्राफ़्ट है, जिसके पर 66 फ़ूट या 20 मीटर लंबे होते हैं। इसे बनाने में 32 मिलियन डॉलर की लागत आती है, यानी यह एक काफ़ी क़ीमती एयरक्राफ़्ट है।
अमरीकी सेना ने इसे इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में जासूसी और हवाई हमलों के लिए इस्तेमाल किया था। इसे हेलफ़ायर समेत एक साथ 8 लेज़र गाइडेड मिसाइलों और दूसरे हथियारों से लैस किया जा सकता है और यह लक्ष्य पर 24 घंटे तक भिनभिना सकता है।
इस घटना से स्पष्ट है कि यूक्रेन युद्ध को लेकर अमरीका और रूस के बीच सीधे टकराव का जोख़िम कितना बढ़ रहा है। दर असल, अमरीका और उसके यूरोपीय सहयोगी लगातार आग में घी डालने का काम कर रहे हैं और इन देशों ने यूक्रेन को हथियारों का भंडार बना दिया है।
अमरीका, यूक्रेन युद्ध को दुनिया पर अपनी ढीली पड़ती पकड़ को फिर से मज़बूत करने और अपने प्रतिद्वंद्वियों ख़ास तौर पर रूस को कमज़ोर करने के अवसर के तौर पर देख रहा है, जबकि रूस ने अब तक इस युद्ध में यही साबित किया है कि युद्ध में उसका पलड़ा भारी है और वह अगले कई वर्षों तक इसे जारी रखने की क्षमता रखता है। msm
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