नेतन्याहू ने सत्ता में वापसी के बाद ही खुद को अदालती कार्रवाई से महफूज़ रखने के लिए देश के अदालती सिस्टम में भारी फेरबदल करने के लिए कैबिनेट से कई प्रस्ताव पास कराए जिसके विरोध में देश भर में पिछले 3 महीने से ही भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस्राईल के 130 से अधिक स्थानों पर भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
इस्राईल में लाखों लोग सड़कों पर उतर कर सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं. इन्हे इस्राईल के इतिहास में हुए अब तक के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन कहा जा रहा है.
नेतन्याहू विरोधी जहाँ सरकार के इस क़दम को लोकतंत्र को कमज़ोर करने की साज़िश बता रहे हैं वहीँ सरकार इसी अदालती सिस्टम में सुधार बता रही है। नेतन्याहू कैबिनेट के इस फैसले के खिलाफ हैफ़ा जैसे शहरों में रिकॉर्ड स्तर पर प्रदर्शनकारी सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे हैं जबकि राजधानी तल अवीव में भी कम से कम दो लाख लोग सरकारी विरोधी प्रदर्शन में शामिल हैं. इसराइली अख़बार हारेत्ज़ ने इन प्रदर्शनों को "देश के इतिहास के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन" कहा है. शनिवार को विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले लोगों की कम से कम तादाद 5 लाख बताई गयी है।
दक्षिणी इस्राईल में बेएरे शेवा में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे याईर लैपिड ने कहा कि इस्राईल "अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट से जूझ रहा है. उन्होंने कहा,कि हमारी सलामती को खतरा है, हमारी अर्थव्यवस्था संकट में है, पैसा देश से बाहर जा रहा है. दूसरी ओर ईरान ने सऊदी अरब के साथ एक समझौता किया है और दोनों कूटनीतिक रिश्ते बहाल करने वाले हैं. लेकिन सरकार को अगर चिंता है तो केवल इस बात की कि वो कैसे लोकतंत्र को तबाह करे.
बता दें कि इस्राईल में जारी गंभीर संकट के बीच जुमेरात को आम जनता ने राजधानी के एयरपोर्ट समेत कई हिस्सों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं और रोम जा रहे बिन्यामिन नेतन्याहू को देश से बाहर जाने से रोकने की कोशिश की थी।
देश की सेना की ओर से भी नेतन्याहू के विरोध की खबरें हैं। कुछ मीडिया सूत्रों के अनुसार पायलटों ने नेतन्याहू को लेकर उड़ान भरने से इंकार कर दिया था। हालांकि ज़ायोनी नेता बाद कुछ देरी से रोम के लिए रवाना हो गए.
ग़ौर तलब है कि मक़बूज़ा फिलिस्तीन में नेतन्याहू के ख़िलाफ़ होने वाले प्रदर्शनों में तेज़ी आ गई है। तल अवीव के हालात कंट्रोल से बाहर हैं हाल ही में बिगड़ती स्थिति को कंट्रोल न कर पाने की वजह से तल अवीव के पुलिस प्रमुख को उनके पद से हटा दिया गया था।
इस्राईली वायु सेना ने भी नेतन्याहू के ख़िलाफ़ ज़ायोनी पायलटों की ओर से की गई हड़तालों और प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के आरोप में कार्यवाही करते हुए एक सीनियर ऑफिसर को नौकरी से निकाल दिया है।
29 दिसंबर, 2022 को सत्ता में आए नेतन्याहू कैबिनेट की न्यायिक सुधार योजना के ख़िलाफ़ 7 जनवरी 2023 से ही भारी विरोध-प्रदर्शन हो रहे है। शायद दुनिया में पहली बार हो रहा है जब किसी कैबिनेट के गठन के एक हफ्ते बाद ही जनता के इतने भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है।