दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध टूटने के 7 साल बाद, शुक्रवार को बीजिंग में संबंधों की बहाली और दूतावासों को फिर से खोलने पर समझौता हुआ।
इस घोषणा के तुरंत बाद, दुनिया भर के मीडिया में यह मुद्दा छा गया और विभिन्न देशों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान का कहना था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान और सऊदी अरब के बीच संबंधों की बहाली से दोनों देशों, क्षेत्र और इस्लामी जगत को अधिक संभावनाएं प्राप्त होंगी।
चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग यी ने इस समझौते की सराहना करते हुए इसे शांति और वार्ता की जीत बताया और कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया कई समस्यों से जूझ रही है, यह दुनिया के लिए एक अच्छी ख़बर है।
अमरीका ने भी क्षेत्र में तनाव कम करने और यमन युद्ध की समाप्ति के लिए उठाए जाने वाले हर क़दम का स्वागत करने का दावा किया है।
हालांकि इस्राईल के पूर्व प्रधान मंत्री नफ़्ताली बेनेत ने इस समझौते को ईरान के लिए एक राजनीतिक जीत तो वहीं इस्राईल के लिए एक गंभीर और ख़तरनाक क़दम बताया है।
उन्होंने कहा कि इस क़दम से ईरान के ख़िलाफ़ एक क्षेत्रीय गठबंधन के गठन के लिए किए जा रहे इस्राईल के पयासों को बड़ा झटका लगेगा। msm
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