अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से कभी ईरान के ड्रोन और मिसाइल कार्यक्रम तो कभी परमाणु कार्यक्रम पर मचाए जाने वाले वावेला पर बड़ा बयान देते हुए रूस ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का रवैया सिर्फ एक ड्रामा है।
वियना में अंतर्राष्ट्रीय ऑर्गनाइज़ेशन में रूस के स्थायी दूत मिखाइल उल्यानॉफ ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता मगरमच्छ के आंसुओं की तरह है.
स्पूतनिक से बात करते हुए मिखाइल ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके घटक देशों की चिंता सिर्फ एक दिखावा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई भी धमकी या दबाव काम नहीं आएगा इस मुद्दे का समाधान राजनैतिक वार्ता से ही मुमकिन है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी जगत अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के गवर्नर्स बोर्ड की बैठक से पहले ही एक बार फिर ईरान के खिलाफ माहौल बनाने में जुट गया है और ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट भी शायद इसी मुहिम का हिस्सा है। बता दें कि ब्लूमबर्ग ने हाल ही में रिपोर्ट देते हुए दावा किया था कि ईरान 84% तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है। ब्लूमबर्ग का यह खुलासा IAEA के प्रमुख ग्रोसी की तेहरान यात्रा से कुछ वक़्त पहले ही ईरान पर दबाव बनाने की साज़िश का हिस्सा है।
ब्लूमबर्ग ने दो राजनैतिक सूत्रों के हवाले से खबर देते हुए दावा किया था कि IAEA के ओब्ज़र्वर्स को ईरान में यूरेनियम के ऐसे ज़र्रे मिले हैं जिस से पता चलता है कि ईरान 84% तक यूरेनियम का संवर्धन कर रहा है।
मिखाइल ने ब्लूमबर्ग की इस रिपोर्ट की ओर इशारा करते हुए कहा कि खुलासे के नाम पर ऐसी संवदनशील बातों को मीडिया में लीक करना मामूली बात नहीं है। इन हरकतों के पीछे राजनैतिक कारण है ताकि इस मुद्दे पर संकट को जन्म दिया जा सके। उन्होंने कहा कि 6 से 10 मार्च तक विएना में होने वाली बैठक को प्रभावित करने के लिए ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। साथ ही ग्रोसी की तेहरान यात्रा को और कठिन करने की साज़िशें की जा रही हैं।
रूसी राजनयिक ने कहा कि इस मुद्दे पर इतना हो हल्ला करने की ज़रूरत नहीं है बल्कि ज़रूरत इस बात की है कि ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते को बहाल किया जाए। अगर परमाणु समझौता बहाल होजाता है तो यह मुद्दा अपने आप खत्म हो जाएगा।1937 से लगातार हो रहा यह जुलूसे अज़ा मस्जिदे पचदरी से बरामद होकर बस्ती के अलग अलग रास्तों से होकर शबीहे कर्बला पहुंचकर ख़त्म होता है जिस में बस्ती और आसपास के इलाक़े की अंजुमनें नौहाख्वानी और सीनाज़नी करती हैं।