18 फ़रवरी 2023 - 11:06
इस्लामी उम्मत और संस्कृति पर हमला सबसे खतरनाक, अमेरिका ने किया आतंकी गुटों का गठन

अंसारुल्लाह के जनरल सेक्रेटरी सय्यद अब्दुल मलिक अल हौसी ने अमेरिका पर दूसरे देशों की संप्रभुता और आज़ादी का धज्जियाँ उड़ाने और उनके आंतरिक मामलों में दखल देने के आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका के लिए दूसरे देशों की आज़ादी और संप्रभुता के कोई मायने नहीं है। अलग अलग देशों में उसके राजदूत मुल्क के दाख़िली मामलों में दखल देते हैं।

यमन के लोकप्रिय जनांदोलन अंसारुल्लाह के जनरल सेक्रेटरी सय्यद अब्दुल मलिक अल हौसी ने अमेरिका पर दूसरे देशों की संप्रभुता और आज़ादी का धज्जियाँ उड़ाने और उनके आंतरिक मामलों में दखल देने के आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका के लिए दूसरे देशों की आज़ादी और संप्रभुता के कोई मायने नहीं है। अलग अलग देशों में उसके राजदूत मुल्क के दाख़िली मामलों में दखल देते हैं।

उन्होंने वहाबी आतंकी संगठनों के बारे में बता करते हुए कहा कि अमेरिका ने इन आतंकी संगठनों को बनाकर इलाक़े के देशों और इस्लामी समाज को इनसे मुक़ाबला करने में उलझा दिया और खुद इनकी आड़ में अपने उल्लू सीधा करता रहा। फिर अपनी खतरनाक साज़िशों को पूरा करने के लिए खुद इन संगठनों का मुक़ाबला करने के लिए दूसरे देशों में घुस आया और लाखों मुसलमानों का क़त्ले आम किया। अमेरिका अपने किराये के टट्टुओं और नादान लोगों को इलाक़े की जनता पर थोपे हुए है ताकि इस्लामी उम्मत को भरपूर नुकसान पहुंचा सके।

उन्होंने अपने बयान के एक हिस्से में इस्लामी उम्मत के खिलाफ दुश्मन की साज़िशों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस्लामी उम्मत पर दुश्मन का सबसे खतरनाक हमला सांस्कृतिक और सक़ाफ़ती हमला है। अरब और इस्लामिक देशों के खिलाफ दुश्मनों के सांस्कृतिक और धार्मिक हमले सबसे खतरनाक हैं। उन्होंने इस कल्चरल वॉर की ओर इशारा करते हुए मिसाल देते हुए कहा कि एजुकेशन सिस्टम इस वॉर का एक अहम् हिस्सा बन चुका है आज दुश्मन ने ज़्यादातर अरब देशों के सेलेब्स से फिलिस्तीनी मुद्दे को हटाते हुए एक तरफ कर दिया है।

उन्होंने कहा कि दुश्मन फ्रीडम ऑफ़ स्पीच के नाम पर इलाही मिशन, क़ुरआने मजीद और इस्लामी मुक़द्देसात की तौहीन करता है। वेस्टर्न कंट्रीज़ और ज़ायोनी लॉबी मुसलमानों कीआस्था को ठेस पहुँचाने और इस्लामी समाज में क़ुरआन की अज़मत और मन्ज़ेलत को कम करने के लिए लगातार क़ुरआने मजीद जलाने की शर्मनाक हरकतें कर रहे हैं।

वह इस्लाम के खिलाफ जारी इस कल्चरल वॉर अमेरिकी लिबरलिज़्म को इस्लामी समाज पर थोपना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम और अरब देशों के दुश्मन बद अख़लाक़ी, अनैतिकता, नाजायज़ रिश्ते और समलैंगिकता को बढ़ावा दे रहे हैं और अरब देशों पर भी दबाव डाल रहे हैं कि वह इसे क़ानूनी शक्ल दे दें। यह खुद मानवता और इंसानियत के खिलाफ घिनौना जुर्म है। दुश्मनों की इन हरकतों के मुक़ाबले पर खामोश रहना और आँखें मूँद लेना एक तरह से उनके आगे घुटने टेकना है।