इस्लामी सहयोग परिषद के सदस्य देशों की अंतरसंसदीय बैठक में भाग लेने के लिए अलजीरिया की यात्रा पर पहुंचे क़ालीबाफ़ ने कहा कि हम इस्लामी उम्मा को उसके एतिहासिक और निर्णायक मुक़ाम पर दोबारा पहुंचाने के लिए नई कोशिशें और गतिविधियां देख रहे हैं।
संसद सभापति ने कहा कि भविष्य की दुनिया में इस्लामी उम्मा की प्रभावी भूमिका के लिए इस्लामी देशों को संयुक्त रूप से योजनाएं और कार्यक्रम तैयार करने की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि इस बात पर सब प्रतिबद्ध हों कि इस्लामी दुनिया के भीतर के हर मतभेद को शांतिपूर्ण ढंग से हल किया जाएगा और वार्ता को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
श्री क़ालीबाफ़ ने कहा कि ग़रीबी, खाद्य संकट, पसमांदगी, आतंकवाद, चरमपंथ, विदेशी ताक़तों का हस्तक्षेप, इस्लामी सभ्यता से पश्चिमी ताक़तों की दुश्मनी और इस्लामी देशों पर पश्चिमी ताक़तों के एकतरफ़ा प्रतिबंध इस्लामी जगत की समस्याएं हैं।
उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन के बेगुनाह अवाम पर ज़ायोनी शासन के अत्याचार भी सारे इस्लामी देशों की चुनौती है।
संसद सभापति ने तेहरान में आज़रबाइजान के दूतावास में होने वाली फ़ायरिंग के बारे में कहा कि यह आतंकी घटना नहीं है, इस संदर्भ में जज़्बाती फ़ैसला दोनों देशों के संबंधों को नुक़सान पहुंचाएगा और इस्लामी दुनिया के दुश्मनों विशेष रूप से ज़ायोनी शासन को इससे फ़ायदा पहुंचेगा इसलिए कोई भी फ़ैसला करने से पहले उसके दीर्घकालिक परिणामों के बारे में ग़ौर कर लेना उचित होगा।
शुक्रवार को एक व्यक्ति ने तेहरान में आज़रबाइमान के दूतावास में घुसकर फ़ायरिंग कर दी जिसमें दूतावास की सेक्युरिटी टीम के चीफ़ की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए।
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