नासिर अबू शरीफ़ ने बीरजंद में एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए कहा कि हमने तो ज़ायोनी शासन के अत्याचारों को सहते हुए ज़िंदगी गुज़ारी है, ज़ायोनी शासन ने शुरू से ही हमारी पूरी नस्ल को तबाह करने की कोशिश की हमारे जवानों में नशे को आम करने के लिए इस्राईल ने बाक़ायदा योजना के साथ काम किया।
जेहादे इस्लामी के नेता ने कहा कि ईरान में जब इस्लामी क्रांति आई तो उसके बाद से फ़िलिस्तीनियों के हालात में भी धीरे धीरे बदलाव आने लगा।
उन्होंने कहा कि इलाक़े में ज़ायोनी एजेंडे को नाकाम बनाने में जनरल क़ासिम सुलैमानी का बड़ा सराहनीय रोल रहा।
नासिर अबू शरीफ़ ने कहा कि ग़ज़्ज़ा छोटी सी जगह है इसका क्षेत्रफल 360 वर्गकिलोमीटर है यहां का सबसे ऊंचा टीला 80 मीटर का है इसलिए सामरिक दृष्टि से यह असुरक्षित इलाक़ा है मगर इसके बावजूद फ़िलिस्तीनी यहां पर प्रतिरोध कर रहे हैं और उन्होंने इस्राईल को अच्छा सबक़ सिखाया है।
उन्होंने जनरल सुलैमानी के योगदान को याद करते हुए कहा कि हमने 2005 में जब राकेट बनाना शुरू किया तो हमारे राकेटों की रेंज 5 किलोमीटर थी औज्ञ आधा किलो विस्फोटक अपने साथ ले जाने में सक्षम थे मगर आज यह स्थिति हो चुकी है कि हमने जनरल सुलैमानी की शहादत के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उन्हीं के नाम से क़ासम मिसाइल बनाया है जो 250 किलोग्राम वारहेड ले जा सकता है और इस्राईल के कड़े परिवेष्टन में होने के बावजूद हम एसे मिसाइल बनाने में सक्षम हुए हैं जिनकी रेंज 200 किलोमीटर है।
नासिर अबू शरीफ़ ने कहा कि हम इस समय ड्रोन बना रहे हैं जो अल्लाह की मेहरबानी और ईरान के सहयोग से संभव हुआ है।
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