7 दिसंबर 2022 - 21:05
ईरान की बर्बादी का सपना देख रहा है अमेरिका, दंगे और अराजकता उसकी योजना का हिस्साः राष्ट्रपति रईसी

इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के छात्रों के राष्ट्रीय दिवस को दुश्मन की पहचान, दुश्मन के ख़िलाफ़ युद्ध, अंतर्दृष्‍टि और ज़िम्मेदारी की भावना का प्रतीक बताया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति सैयद इब्राहीम रईसी ने तेहरान यूनिवर्सिटी में विश्वविद्यालय के छात्रों के राष्ट्रीय दिवस और सात दिसंबर के शहीदों के याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह ख़ास दिन विश्वविद्यालयों की स्थिति, घटने वाली घटनाओं के बारे में उचित जानकारी, वैचारिक और आत्मचिंतन परिपक्वता का दिन है। राष्ट्रपति रईसी ने विश्वविद्यालयों को थिंक टैंक और परामर्श केंद्र बताया और छात्रों से समस्याओं के समाधान में सरकार की मदद करने की अपील की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विश्वविद्यालय के छात्र समाज की समस्याओं को अधिक और बेहतर ढंग से हल करने का प्रयास कर सकते हैं। राष्ट्रपति रईसी ने कहा कि मैं छात्रों के साथ संपर्क को अपने लिए गौरवान्वित और बुद्धिजीवियों की दृष्टि से लाभ उठाने का सर्वोत्तम अवसर मानता हूं। उन्होंने कहा कि आज हमारे विश्वविद्यालयों ने दुश्मन पर करारा प्रहार किया है, इसलिए दुश्मन इन विश्वविद्यालयों को ज्ञान के प्रचार-प्रसार और विकास से रोकना चाहता है, लेकिन विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों ने दुश्मन की योजनाओं पर पानी फेर दिया है।इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि प्रदर्शनकारियों की आवाज़ हर हाल में सुनी जानी चाहिए और हम छात्रों की बात सुनने के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने कहा कि रा विरोध और हंगामे में अंतर होता है। विरोध से मामलों में सुधार होता है जबकि दंगे और तोड़फोड़ निराशा का कारण बनते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ईरान में अराजकता फैलाना और दंगे कराना चाहता है। वह एक शक्तिशाली ईरान के बजाय एक तबाह ईरान देखना चाहता है। वह ईरान को सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान में बदलना चाहता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि ईरानी राष्ट्र के शिक्षित पुरुष और महिलाएं उसे ऐसा नहीं करने देंगे। ग़ौरलतब है कि इस्लामी गणराज्य ईरान में हर साल 7 दिसंबर को विश्वविद्यालय के छात्रों का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। 7 दिसंबर, 1953 को, ईरानी छात्रों ने तेहरान विश्वविद्यालय के सामने तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की तेहरान यात्रा और ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था। अमेरिका की ग़ुलाम अत्याचारी शाही सरकार के एजेंटों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाकर प्रदर्शन को कुचल दिया था। इस हमले में तीन छात्रों की मौत हो गई थी और सैकड़ों घायल हो गए थे। (RZ)

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