साप्ताहिक पत्रिका इकोनामिस्ट ने अधिकतम दबाव की नीति का विश्लेषण करते हुए लिखा है कि इस समय जो बाइडेन की अध्यक्षता में अमेरिकी सरकार परमाणु समझौते में वापसी की दिशा में प्रयासरत है।
इस पत्रिका ने लिखा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते को अमेरिकी इतिहास का सबसे बदतरीन समझौता बताया था और परमाणु समझौते से निकल जाने के बाद उन्होंने तेहरान के खिलाफ जो प्रतिबंध लगाये थे उसका लक्ष्य ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालना था।
इसी प्रकार इकोनामिस्ट ने लिखा है कि ट्रंप का लक्ष्य तेहरान पर अधिक से अधिक दबाव डालना और वाइट हाउस की मांगों को स्वीकार करने के लिए ईरान को मजबूर कर देना था परंतु ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डालने की नीति विफल हो गयी और अमेरिका की यह नीति ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों के विकास व प्रगति की दिशा में कोई बाधा न बन सकी।
इसी प्रकार इकोनामिस्ट पत्रिका ने लिखा है कि अब इस्लामी गणतंत्र ईरान है जिसने अमेरिका पर अधिक से अधिक दबाव डाल रखा है। साप्ताहिक पत्रिका इकोनामिस्ट ने लिखा कि क्षेत्रीय दृष्टि से भी ईरान मज़बूत व शक्तिशाली हो गया है और इस देश ने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद की अपने पद पर बाकी रहने में मदद की और इसी तरह उसने इराक में दाइश से मुकाबला करने में अपने दोस्तों की मदद की।