समाचार एजेन्सी फार्स की रिपोर्ट के अनुसार इराकी सेना के वरिष्ठ कमांडर तहसीन अलखफ्फ़ाजी बताया है कि अमेरिकी सैनिकों ने इराक से निकलना आरंभ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इराक में अपने सैनिकों के बने रहने की अपील नहीं की।
इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने कहा है कि बात- चीत के माध्यम से जो सहमति बनी है उसके प्रति वह कटिबद्ध है और 31 दिसंबर इराक में अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति का अंतिम दिन होगा। अलखफ्फाजी ने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण और अनुभवों के आदान- प्रदान के बारे में दोनों देशों के मध्य सहयोग जारी रहेगा।
इसी प्रकार उन्होंने कहा कि आतंकवादी गुट दाइश से मुकाबले के संबंध में सुरक्षा जानकारियों के आदान- प्रदान के संदर्भ में सहयोग जारी है और शायद इराकी सुरक्षा बलों को हवाई सहायता की ज़रूरत हो तो इसके लिए अमेरिका से अपील की जा सकती है।
इसी बीच इराक की सरकारी समाचार एजेन्सी ने इस देश के प्रधानमंत्री मुस्तफा अलकाज़िमी और सेंटकाम के कमांडर केनेथ एफ़ मेकेन्ज़ी जुनियर के बीच बगदाद में मुलाकात की खबर दी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्षों ने इस भेंट में इराक से अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति की समाप्ति पर एक बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई है। सेंटकाम के कमांडर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच वार्ता के माध्यम से जो स्ट्रैटेजिक उपलब्धि हासिल हुई है उसके अनुसार इराक से अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति के कम हो जाने के बावजूद राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और इसी प्रकार सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग कम नहीं होगा।
ज्ञात रहे कि बगदाद और वाशिंग्टन ने इस बात पर सहमति जताई है कि जारी वर्ष का 31 दिसंबर इराक से अमेरिकी सैनिकों के निकलने की अंतिम तारीख़ है।
जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका ने अपने सैनिकों की जो दुर्गति अफगानिस्तान में देखी है वह नहीं चाहता कि वही अंजाम इराक में भी हो इसलिए उसने भागने को रहने पर प्राथमिकता दी है।