11 अगस्त 2021 - 14:03
आयतुल्लाह ख़ामेनईः कोरोना वायरस की महामारी का उफान देश का सबसे अहम और तत्कालिक विषय है

सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई ने बुधवार को टेलीविजन से प्रसारित अपने बयान में, कोरोना की बीमारी के बेहद फैलाव का ज़िक्र किया और कहा कि यह देश का सबसे अहम मुद्दा है जिस पर फ़ौरन ध्यान देने की ज़रूरत है।

सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनेई ने बुधवार 11 अगस्त को कोविड-19 बीमारी के बारे में टेलीविजन पर अपने मैसेज में, कोरोना की बीमारी के उफान को देश का सबसे पहला व अहम मुद्दा बताया जिस पर फ़ौरन ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने अपने मैसेज के शुरू में शहीदों के सरदार हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके साथियों की सेवा में सलाम पेश किया और देश की जनता और अधिकारियों से कई बिन्दुओं का ज़िक्र किया।

सुप्रीम लीडर ने कहाः कोविड-19 बीमारी बेक़ाबू हो गयी है, न सिर्फ़ ईरान बल्कि क़रीब क़रीब पूरी दुनिया में बेक़ाबू हो गयी है। उन्होंने कहा कि यह दुश्मन यानी कोरोना वायरस जब नया रूप अख़्तियार करता है तो उससे निपटने की रक्षा शैली और तरीक़ा भी उसी के मुताबिक़ बदलना चाहिए। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनेई ने कोरोना को इस वक़्त देश का ऐसा सबसे अहम मुद्दा बताया जिस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने कोरोना से मरने वालों और इसकी चपेट में आने वालों की तादाद को दर्दनाक बताते हुए, राष्ट्रपति की ओर से कोरोना की नई लहर से एक हफ़्ते के भीतर निपटने के लिए तय की गयी मुद्दत को सराहा।

इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर ने मेडिकल विभाग की स्थिति की सराहना करते हुए डॉक्टरों व नर्सों सहित मेडिकल कैडर के काम को जेहाद बताया और कहाः “दिल की गहराई से इन लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ, हालांकि हमारे इस शुक्रिये की कोई अहमियत नहीं है क्योंकि अस्ल शुक्रिया तो अल्लाह की तरफ़ से है जो शुक्रिया अदा करने वाला और सबसे ज़्यादा ज्ञानी है और इनकी मेहनतों को देख रहा है।” आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने कुछ अहम बिन्दुओं की ओर सरकार का ध्यान मोड़ते हुए, कोरोना की टेस्टिंग के चलन को अच्छा क़दम बताया और इसके दायरे को फैलाने तथा फ़्री में टेस्ट करने पर ताकीद की। उन्होंने कुछ देशों की ओर से ईरान को कोरोना के टीके बेचने के संबंध में की गयी वादा ख़िलाफ़ी के बारे में कहाः “आयात का मामला ऐसा था कि सरकार और हेल्थ मिनिस्ट्री ने कुछ जगहों से कोरोना के टीके ख़रीदे थे, कुछ देशों और कोवैक्स तंत्र ने टीके के पैसे दिए जाने के बाद भी वादा ख़िलाफ़ी की। जब हमारा अपना टीका बाज़ार में आ गया और लोगों ने लगाना शुरू कर दिया तो स्थिति बेहतर हुयी यानी इम्पोर्ट का रास्ता खुल गया।”

इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर ने कहा कि इम्पोर्ट और देश के भीतर प्रोडक्शन के लिए दोहरी कोशिश होनी चाहिए ताकि जिस तरह भी मुमकिन हो, सभी के लिए टीका उपलब्ध हो सके, दसियों लाख टीके हमारे पास होने चाहिए। उन्होंने अपने बयान में दवा और उसे बांटने वाले नेटवर्क का ज़िक्र करते हुए कहा कि लोगों तक दवा पहुंचने के रास्ते में रुकावट बनने वाली चीज़ों और दलाली से कड़ाई से निपटा जाए। इसी तरह उन्होंने कोरोना के फैलाव की शुरुआत में सेना और स्वयंसेवी बल बसीज की मदद की अहमियत का ज़िक्र करते हुए, लोगों की मदद करने में इन बलों की क्षमता से ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने पर बल दिया।

आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनेई ने जनता से कुछ सिफ़ारिशें करते हुए लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल पर अमल करने की अपील की और इसकी अनदेखी को पूरे समाज की सेहत को ख़तरे में डालने के बराबर बताया। उन्होंने मोहर्रम की मजलिसों के आयोजन की ओर इशारा करते हुए, इन मजलिसों को अल्लाह की रहमत का कारण बताया। उन्होंने कहाः “हमें इन मजलिसों की ज़रूरत है। यह मजलिसें होनी चाहिए लेकिन पूरी एहतियात और कोरोना प्रोटोकॉल पर पूरी तरह अमल के साथ।” इस्लामी क्रान्ति के सुप्रीम लीडर ने जनता से कोरोना का दौर में एक दूसरे की मदद जारी रखने पर बल दिया। उन्होंने आख़िर में कहाः “मैं आप सबसे ईश्वर से दुआ और प्रार्थना की ताकीद करता हूं।” उन्होंने लोगों कहा कि वे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मजलिसों में ईश्वर से गिड़गिड़ा कर दुआ करें ताकि वह ईरान समेत दुनिया भर के लोगों को इस बुरी बीमारी से मुक्ति दिलाए।