7 अगस्त 2021 - 19:09
भावी युद्ध इस्राईल की मौत के नाम से याद किया जायेगा,उसके विघटन की भूमि प्रशस्त हैः जनरल सलामी

ईरान के संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी के कमांडर ने कहा है कि इस समय ज़ायोनी शासन के विघटन की भूमि प्रशस्त है और यही काफी है कि उससे ग़लती हो जाये ताकि भावी युद्ध को उसकी मौत के नाम से याद किया जाये।

आज शनिवार को लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन के उप महासचिव शैख नईम क़ासिम ने सिपाहे पासदारान के प्रमुख कमांडर जनरल हुसैन सलामी से मुलाकात की जिसमें जनरल सलामी ने कहा कि हिज़्बुल्लाह का जन्म जैसे रणक्षेत्र में हुआ है और वह उसी में पला- बढ़ा है और ज़ायोनी दुश्मन हिज़्बुल्लाह की शक्ति और उसकी मजबूती को बहुत अच्छी तरह जानता है।

इसी प्रकार उन्होंने हिज़्बुल्लाह को लेबनानी जनता की सुरक्षा का कारण बताया और कहा कि हम ऐसी हालत में प्रतिरोध की शक्ति में वृद्धि के साक्षी हैं जब दुश्मन प्रतिरोध के मुकाबले में अपने पतन की ओर अग्रसर है यद्यपि सोशल साइटों, संचार माध्यमों और मनोवैज्ञानिक युद्ध में वह इसका उल्टा दिखाने के प्रयास में है।

सिपाहे पासदारान के कमांडर जनरल सलामी ने इस्राईली सेना को रोकने में हिज़्बुल्लाह की हालिया साहसिक कार्यवाहियों की ओर संकेत किया और कहा कि हिज़्बुल्लाह ने अवैध जायोनी शासन के नये प्रधानमंत्री को दिखा दिया कि समीकरण कहीं और तय होते हैं और कोई चीज़ बदली नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि जायोनी इस वास्तविकता को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि अगर हिज़्बुल्लाह के हमले आरंभ हो गये तो निश्चित रूप से उन्हें अवैध अधिकृत फिलिस्तीन छोड़कर भागना पड़ेगा और यह स्थिति जायोनी शासन के विघटन का कारण बनेगी  जो सख्त व कठिन भी नहीं है।

इसी प्रकार उन्होंने इस मुलाकात में हिज़्बुल्लाह और लेबनानी प्रतिरोध का समर्थन जारी रहने पर बल दिया और कहा कि हिज़्बुल्लाह केवल एक सैन्य बल नहीं है बल्कि वह लेबनानी जनता के सुकून का कारण है और लेबनानी जनता के समस्त वर्गों के मध्य उसका एक विशेष व ऊंचा स्थान है और इस स्थान को बाक़ी रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

इस मुलाकात में शैख नईम क़ासिम ने भी लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के प्रति ईरानी राष्ट्र विशेषकर सिपाहे पासदारान के समर्थन की सराहना की और कहा कि हिज्बुल्लाह और लेबनानी लोग अपनी उपलब्धियों व सफलताओं को इस्लामी गणतंत्र ईरान के समर्थन और कुर्बानियों विशेषकर शहीद जनरल सुलैमानी के त्याग व बलिदान का परिणाम मानते हैं।