काज़िम ग़रीबाबादी ने कहा कि अमेरिका और पश्चिम ने हालिया परमाणु वार्ता में दर्शा दिया है कि मिसाइल और क्षेत्रीय समस्याओं व मामलों जैसे असंबंधित विषयों तक पहुंचने के लिए वे अब भी परमाणु समझौते को एक पुल के रूप में देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका दावा करता है कि वह परमाणु समझौते में वापस आने के लिए तैयार है और परमाणु समझौते के खिलाफ जो प्रतिबंध हैं उन्हें उठाने के लिए तैयार है परंतु वार्ता में उसका यह व्यवहार साबित नहीं होता है।
श्री ग़रीबाबादी के कथनानुसार अमेरिका प्रचलित हथियारों के संबंध में प्रतिबंधों को हटाने के लिए तैयार नहीं हुआ जबकि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 और परमाणु समझौते से यह प्रतिबंध पूरी तरह विरोधाभास रखता है और एक प्रकार से परमाणु समझौते में वापसी हेतु अमेरिकी दावे से भी विरोधाभास रखता है।
ईरानी राजदूत ने इसी प्रकार वियना में कहा कि यह कार्यवाहियां इस बात की सूचक हैं कि अमेरिका की नई सरकार भी पहले वाली सरकार की ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव की नीति पर अमल कर रही है।