राज्य के विधि आयोग ने विवादास्पद उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण बिल का मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत दो बच्चों की नीति लागू किये जाने का प्रावधान है।
मसौदे में इस बात की सिफ़ारिश की गई है कि 'दो बच्चों की नीति' का उल्लंघन करने वालों को स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार बनने, सरकारी नौकरी हासिल करने और प्रमोशन पाने से रोका जाएगा और उन्हें सरकार की किसी भी तरह की सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा।
आयोग ने जो मसौदा तैयार किया है, उसे अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है और लोगों से कहा गया है कि वे 19 जुलाई तक इसपर अपनी राय रखें।
वहीं बिल के मसौदे में जनसंख्या नीति पर अमल करने वालों को अतिरिक्त सुविधाएं देने की सिफ़ारिश भी की गई है।
विशेषज्ञों ने बिल के प्रावधानों को जहां बहुत ही उलझाने वाला क़रार दिया है, वहीं इस बिल की टाइमिंग और मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।
कई जानकारों ने इस क़ानून के स्वरूप को तानाशाही बताया है, तो कई ने राज्य में होने वाले विधान सभा चुनाव से ठीक पहले मुसलमानों को टारगेट करने और हिंदुओं का ध्रुवीकरण करने की एक चाल क़रार दिया है।
हालांकि राज्य की योगी सरकार ने इसका बचाव किया है और उम्मीद जताई है कि सभी इस क़ानून का स्वागत करेंगे, लेकिन ज़्यादातर विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने इसे ख़ारिज कर दिया है।