अतवान ने अपनी साप्ताहिक वीडियो में, जो संसार की अहम घटनाओं की समीक्षा पर आधारित होता है, ईरान में 13वें राष्ट्रपति चुनाव का जायज़ा लिया है। उन्होंने कहा है कि यह चुनाव अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से समीकरणों को बदल देगा। उन्होंने इस बात की तरफ़ इशारा करते हुए कि ईरान, प्रतिबंधों को पीछे छोड़ने में सफल रहा है, कहा कि अमरीका की पाबंदियां भी तेहरान के संकल्प को प्रभावित न कर सकीं। अतवान ने वियना वार्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान अब भी अपने सैद्धांतिक रुख़ पर डटा हुआ है और उसके मुक़ाबले में अमरीकी चाहते हैं कि ईरान परमाणु समझौते के आधार पर अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं के पालन की ओर लौट आए और इसके लिए वे बुरी तरह छटपटा रहे हैं।
रायुल यौम के प्रधान संपादक ने अपने इस वीडियो में ईरान के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के पूर्व प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू की धमकियों के बारे में भी बात की है और कहा है कि नेतनयाहू जो हमेशा ईरान और परमाणु समझौते के बारे में बात करते रहते थे, आज कहां हैं? न उन्होंने कोई हमला किया और न वे कर सकते थे क्योंकि वे जानते थे कि इस्राईल ग़ज़्ज़ा तक का मुक़ाबला नहीं कर सकता और वह भी वह ग़ज़्ज़ा जिसका क्षेत्रफल सिर्फ़ 240 वर्ग किलो मीटर है! ग़ज़्ज़ा के लोगों ने इस्राईल और आयरन डोम को धूल चटा दी और नेतनयाहू, ईरान को हराने के सपने देख रहे थे! अब्दुल बारी अतवान ने चुनाव के बारे में ईरान की इस्लामी क्रांति के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों ईरानियों ने मतदान किया, ईरान में सरकार है और इसे ही सही अर्थ में सरकार कहते हैं।
प्रख्यात अरब टीकाकार ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि अरब दुनिया में जो भी ईरान का समर्थन करे, उस पर आरोप लगने लगते हैं, कहा है कि यह मत कहो कि अतवान, ईरान का समर्थन करता है, नहीं ... मैं समीक्षा करता हूं और जायज़ा लेता हूं! वे लोग जो हम पर आरोप लगाते हैं, आज कहां हैं? ईरान से सीखिए। आपको तो यह तक नहीं पता कि बैलिट बाॅक्स क्या होता है, तुम सिर्फ़ फल-सब्ज़ी के बाॅक्स पहचानते हो! इस लिए आओ और ईरान से सीखो। अब्दुल बारी अतवान ने अपने वीडियो के अंत में अरब देशों से कहा है कि वे ज़ायोनी शासन के बजाए ईरान के घटक बनें और इस देश से सीख कर सैन्य उद्योग चालू करें और आत्मनिर्भरता तक पहुंचें। उन्हें मीज़ाइल और ड्रोन बनाना चाहिए और सेना का गठन करना चाहिए।