13 जून 2021 - 14:46
राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों की तीसरी और अंतिम डिबेट, कार्यक्रमों की प्रस्तुति और दृष्टिकोणों व क्रियाकलापों की आलोचना

ईरान में 13वें राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों की तीसरी व अंतिम डिबेट शनिवार की शाम आयोजित हुई जिसमें प्रत्याशियों ने अपनी अपनी संभावित सरकार के कार्यक्रम पेश किए और दूसरे उम्मीदवारों के दृष्टिकोणों व क्रियाकलापों की आलोचना की।

तीसरे डिबेट का मुख्य विषय जनता की अहम चिंताओं पर आधारित था जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व विदेश नीति संबंधी अनेक विषयों पर चर्चा हुई। डिबेट के लिए सवाल कुछ इस तरह से तैयार किए गए थे कि उम्मीदवार अपने अपने आगामी कार्यक्रम और योजनाएं पेश कर सकें और इसी तरह समस्या का समाधान भी बता सकें।

आर्थिक संभावनाओं से लाभ उठाना, युवाओं, आवास, महंगाई, स्वास्थ्य व उपचार और विदेशी संबंधों की समस्याएं ऐसे विषय थे जिन पर इस डिबेट में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने बहस की। इस लिहाज़ से डिबेट एक उचित अवसर व  प्लेटफ़ार्म था हालांकि जनता की चिंताएं, ऐसा विषय नहीं है जिस पर एक या दो डिबेट में पूरी चर्चा की जा सके। विशेष कर इस लिए कि डिबेट में ज़्यादातर रुझान इस बात का होता है कि अन्य उम्मीदवारों के कार्यक्रमों और सरकार के क्रियाकलाप की आलोचना की जाए। नारे, आरोप और अधिकारियों के कामों पर टिप्पणी, तीनों डिबेट्स के अहम पहलू थे और इसी के साथ बड़ी संख्या में लोगों से वादे भी किए गए।

जो बात स्पष्ट है वह यह है कि अर्थव्यवस्था और आर्थिक समस्याओं का समाधान और भेदभाव व भ्रष्टाचार से संघर्ष, जनता की मूल मांगें हैं जिन्हें ऐसे वादों से पूरा नहीं किया जा सकता जो व्यवहारिक ही न हों। अतीत पर नज़र और पिछली ग़लतियों से पाठ लेना, पैदावार व प्रगति के लिए सभी आंतरिक क्षमताओं व संभावनाओं से अधिकतम लाभ उठाना और राष्ट्रीय एकता को सुरक्षित रखना, समस्याओं के समाधान के लिए ज़रूरी है। इस विषय के दो पहलू हैं। एक पहलू यह है कि प्रतिबंधों और कोरोना के फैलाव के कड़े दौर में हासिल की जाने वाली उपलब्धियों को न तो भूला जाए और न ही उन्हें कम आंका जाए। दूसरा पहलू यह है कि समस्याओं के सामने अपने आपको निराश न किया जाए बल्कि कमियों को स्वीकार करते हुए व्यवहारिक समाधानों पर भरोसा किया जाए।

कुल मिला ऐसा लगता है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा में सभी उम्मीदवार, देश की शक्ति को सुरक्षित रखने के साथ ही आंतरिक क्षमताओं और आर्थिक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर भरोसा रखते हैं लेकिन उनकी शैलियों व प्राथमिकताओं में अंतर पाया जाता है और दृष्टिकोणों का यह अंतर बहुत स्वाभाविक है। बहरहाल, देश के मौजूदा हालात में एक ऐसे उम्मीदवार के चयन की ज़रूरत है जो काम करने वाला हो और जिसके पास कार्यक्रम के साथ ही अनुभव और मज़बूत संचालन शक्ति हो। जनता ने भी यह सिद्ध किया है कि वह किसी भी स्थिति में चुनाव में भाग लेने से पीछे हटने वाली नहीं है। जहां तक चुनावी डिबेट की बात है तो वह चुनावी प्रचार और प्रतिस्पर्धा का एक अवसर है जिसके माध्यम से उम्मीदवारों के कार्यक्रमों और उनके समाधानों की उपयोगिता को आंका जाता है