उन्होंने संसद के खुले सत्र से पहले कहाः हम क़ाबिज़ ज़ायोनी शासन द्वारा मस्जिदुल अक़्सा के अनादर और फ़िलिस्तीनी जनता ख़ास तौर पर बच्चों के रक्तपात की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि ज़ायोनी शाशन किसी भी हालत में मानवाधिकार का पालन नहीं करता, हर दिन हम उसके अपराध को देखते हैं और हमारा सवाल यह है कि दुनिया में मानवाधिकार की संरक्षक संस्थाएं कहां हैं जो इस तरह के कृत्य पर कुछ नहीं बोलतीं। ईरान के संसद सभापति ने कहाः उन्हें यह बात जान लेनी चाहिए कि उनके हाथों हो रहे जातीय सफ़ाए के ख़िलाफ़ इस्लामी जगत खड़ा है और हम यह देख रहे हैं कि ग़ज़्ज़ा की जनता किस तरह ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ डटी हुयी है।
क़ालीबाफ़ ने कहाः हम यहां से रूढ़ीवादी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से, जो इंसानियत के हत्यारे शासन के साथ संबंध बहाल कर रहे हैं, कहना चाहते हैं कि वे यह जान लें कि इस्लामी जगत और प्रतिरोध के जियाले इन अपराधों के ख़िलाफ़ डट जाएंगे और ईश्वर की कृपा से सफलता हासिल होगी। उन्होंने इसी तरह अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में बच्चों के स्कूल के पास हुए हालिया आतंकवादी हमले की निंदा की जिसमें बड़ी तादाद में बेगुनाह बच्चे शहीद हुए। उन्होंने इस घटना के पीड़ितों के परिजनों से हमदर्दी जतायी।