कुछ लोग तो कहते हैं कि यह दुर्घटनाएं हैं जो लापरवाही का नतीजा हैं। मगर कुछ लोग इससे अलग हटकर विचार दे रहे हैं और यह मान रहे हैं कि इन घटनाओं के पीछे कोई है। या तो भीतर ही फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक शक्तियों की ओर से कुछ हो रहा है या बाहर से ईरान और हिज़्बुल्लाह की ओर से कोई कार्यवाही की जा रही है। इन घटनाओं को साबइर संसाधनों की मदद से अंजाम दिया जा रहा है।
दो हफ़्ते से भी कम समय में तेल अबीब के बिन गोरियन एयरपोर्ट पर आग लग गई, आग लगने की एक और घटना हैफ़ा की रिफ़ाइनरी में हुई, हैफ़ा में ही अमोनिया जैसी घातक गैस के भंडार से रिसाव हो गया। रमला शहर में मिसाइल के कारख़ाने में धमाका हो गया। एक धार्मिक समारोह में पुल गिर जाने से 45 लोगों की मौत हो गई और 150 लोग घायल हो गए। यह लोग उत्तरी इलाक़े जरमक़ में यहूदियों की ईद मनाने के लिए जमा हुए थे। ज़हरीले पेट्रोलियम पदार्थ के रिसाव के कारण उत्तर में नाक़ूरा से लेकर दक्षिण में ग़ज़्ज़ा पट्टी तक पूरा तट बंद करना पड़ा।
कुछ ही दिनों के भीतर इस तरह की कई घटनाएं हो गईं जो तीसरी दुनिया के किसी देश में तो समझ में आ सकती हैं लेकिन मध्यपूर्व में अपनी प्रगति का ढिंढोरा पीटने वाले इस्राईल में इस प्रकार की स्थिति समझ से बाहर कही जा रही है।
हम यहां यह बात नहीं करना चाहते कि सीरियाई मिसाइल के सामने अमरीका और इस्राईल की संयुक्त मेहनत से बनने वाला मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम आयरन डोम नाकाम साबित हुआ क्योंकि मिसाइल डिमोना परमाणु केन्द्र से कुछ ही किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गया और वहां जाकर विस्फोटित हुआ। हम यहां संदिग्ध घटनाओं की बात कर रहे हैं। जिनके बारे में इस्राईली प्रशासन ने भी माना है कि यह घटनाएं हुई हैं।
तेल का रिसाव, हैफ़ा की आग, तेल अबीब की आग, रमला के मिसाइल कारख़ाने में धमाके जैसी घटनाओं में अगर फ़िलिस्तीनी संगठनों या हिज़्बुल्लाह अथवा ईरान का हाथ हो तो यह कोई हैरत की बात नहीं है। इस्राईल ने इन घटनाओं की रिपोर्टिंग पर कड़ाई से रोक लगा रखी है।
अब अगर हम नज़र डालें वियेना में ईरान के परमाणु मुद्दे पर होने वाली वार्ता को लेकर इस्राईली सरकार में फैली चिंता पर, दूसरी तरफ़ अगर हम देखें कि नेतनयाहू फिर सरकार गठन में नाकाम हो गए हैं और पांचवीं बार चुनाव कराए जाने की संभावना पैदा हो गई है तो समझ में आएगा कि इस्राईली लेखकों ने इस्राईलियों को यह मशविरा क्यों देना शुरू कर दिया है कि वह अमरीका और यूरोप की ओर पलायन शुरू कर दें क्योंकि इस्राईली सिस्टम ध्वस्त होने की स्थिति के क़रीब पहुंच रहा है।
अगर यह विध्वंस फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के उदय के ज़माने में होता है तो सोच लीजिए कि क्या हालात होंगे?
आने वाले दिनों में चौंका देने वाली बहुत सी घटनाएं होंगी बस इंतेज़ार कीजिए।
स्रोतः रायुल यौम