12 मार्च 2021 - 17:13
क़ुरआने मजीद के ख़िलाफ़ जनहित याचिका के ख़िलाफ़ विरोध का सिलसिला तेज़, वसीम रिज़वी के विचार शिया मत के विरुद्ध

भारत के औद्योगिक नगर मुंबई में शिया धर्मगुरुओं ने क़ुरआने मजीद के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका के बारे में एक बैठक आयोजित करके शिया समुदाय के नाम एक बयान जारी किया है।

मुंबई में शिया धर्मगुरुओं के संगठन मजलिसे उलमा व ख़ुतबाए हिंद ने शुक्रवार को एक आपात बैठक आयोजित की जिसमें बड़ी संख्या में शिया धर्मगुरुओं और वक्ताओं ने भाग लिया। बैठक के बाद संगठन ने शिया समुदाय के नाम एक बयान जारी करके कहा है कि क़ुरआने मजीद ईश्वर की किताब हैं और इसमें पहले दिन से लेकर अब तक किसी भी प्रकार का फेर-बदल नहीं हुआ है। बयान में कहा गया है कि क़ुरआने मजीद, पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के ज़माने में जैसा था, वैसा ही आज भी है और उसमें कोई कमी-बेशी नहीं हुई है।

 

मजलिसे उलमा व ख़ुतबाए हिंद के बयान में कहा गया है कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में क़ुरआने मजीद में कमी-बेशी या फेर बदल की बात करता है तो यह चीज़ ठोस शिया और इस्लामी आस्थाओं के ख़िलाफ़ है। शिया धर्मगुरुओं ने कहा है कि जो भी वसीम रिज़वी की तरह क़ुरआने मजीद में फेर बदल की बात करता है तो यह शियों और मुसलमानों के नहीं बल्कि उसके निजी विचार हो सकते हैं। शिया धर्मगुरुओं के संगठन ने अपने बयान में कहा है कि हम इस तरह के विचारों की कड़ी निंदा करते हैं और इस्लामी समुदाय को फूट से सुरक्षित रखने की ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।