11 मार्च 2021 - 12:24
हम हमेशा पीड़ितों के साथ और साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने खड़े रहे और खड़े रहेंगे, वरिष्ठ नेता

इइस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतु्ल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की घोषणा के दिन के उपलक्ष्य में टीवी पर राष्ट्र के संबोधित किया।

वरिष्ठ नेता ने गुरुवार को टीवी पर अपन भाषण में कहा कि सहयोग के क्रम को तोड़ना और सच्चाईयों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना दुश्मन के दो महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। 

वरिष्ठ नेता ने कहा कि इमाम खुमैनी की पहल और साहस की वजह से इस्लामी क्रांति ने पैगम्बरे इस्लाम के मिशन को पुनर्वजीवित किया और इसी लिए इस क्रांति को दुनिया भर के दुष्टों की दुश्मनी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन सही राह पर डटे रहने से उनकी शत्रुता का कुछ असर नहीं होगा।

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रति अत्याचारियों की दुश्मनी का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भी इस्लामी व्यवस्था को , जिसे दुश्मनों के प्रचारों में राजनीतिक इस्लाम कहा जाता है हर प्रकार के षडयंत्र का सामना है क्योंकि इस व्यवस्था ने ईश्वरीय सत्ता के लिए सरकार का गठन करने और ईरान की महान जनता को धार्मिक व इस्लामी पहचान दिलाने में सफलता प्राप्त की है। 

वरिष्ठ नेता ने इस बात पर बल दिया कि इस्लामी क्रांति, बेअसत का अनुसरण करते हुए अत्याचार, तानाशाही और साम्राज्य के सामने खड़ी रही और हमेशा पीड़िता का साथ दिया।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस्लामी व्यवस्था के गठन के साथ ही वही सब कुछ होने लगा जो ईश्वरीय दूतों  के लिए होता था और दुनिया भर के दुष्ट ईरानी राष्ट के सामने खड़े हो गये। 

वरिष्ठ नेता ने साम्राज्यवादी शक्तियों की ओर से सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि वह यह कुप्रचार करते थे कि इस्लामी व्यवस्था पुरी दुनिया से भिड़ी है जबकि इस्लामी व्यवस्था, कुरआने मजीद की शिक्षाओं के आधार पर, केवल उन्ही लोगों के सामने खड़ी होती है जो ईरानी राष्ट्र से दुश्मनी करते हैं और बाकी अन्य राष्ट्रों से उसके अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। 

वरिष्ठ नेता ने यमन का उल्लेख करते हुए कहा कि यमन की दुखी जनता, पिछले 6 वर्षों से अमरीका के ग्री सिगनल की वजह से सऊदी अरब के पत्थर दिल शासकों द्वारा बमबारी और आर्थिक घेराबंदी का दुख सहन कर रही है लेकिन बड़े बड़े दावे करने वाली पश्चिमी सरकारों की ओर से कोई आपत्ति नहीं की जाती। 

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने अब यमन के योग्य लोगों ने कुछ रक्षात्मक साधन बना कर दुश्मनों के हमलों का जवाब दे रहे हैं तो संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से भी विरोध और एतेराज़ की आवाज़ सुनायी देने लगी है और संयुक्त राष्ट्र की यह हरकत अमरीकी क़दम से भी बुरी है। 

वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका के पास दुनिया का सब से बड़ा परमाणु हथियारों का भंडार है और उसने परमाणु बम से दो लाख बीस हज़ार लोगों की हत्या भी की है, इसके साथ ही वह सामहिक विनाश के हथियारों के विरोध का भी दावा करता है। अमरीका मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करता है लेकिन उस सऊदी सरकार का समर्थन करता है जो अपने विरोधियों को आरी से टुकड़े टुकड़े कर देती है। अमरीका दाइश का सरम्थ करता है और सीरिया का तेल बेचने के लिए उनके साथ सहयोग भी करता है लेकिन इसके साथ ही आतंकवाद के खिलाफ युद्ध का भी दावा करता है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह सब अमरीकी सरकार के विरोधभास और सच्चाई को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का चिन्ह है। 

वरिष्ठ नेता ने इस्लामी गणतंत्र ईरान, इलाक़े में जहां भी , चाहे  सीरिया हो या इराक़, गया है तो उसका मक़सद इन देशों  की क़ानूनी सरकार का समर्थन रहा है और यह उपस्थिति उस देश की सरकार की अपील पर और सलाह के लिए रही है जबकि अमरीकी ज़बरदस्ती इराक़ और सीरिया में घुसे और अब वहां छावनियां बना कर रह रहे हैं। 

वरिष्ठ नेता ने बल दिया कि अमरीका को हर हाल में इराक़ से निकल जाना चाहिए क्योंकि यह इराक़ियों का कानून है और उनकी इच्छा भी, इसी तरह सीरिया से भी उसे जल्द ही निकल जाना होगा।