अल-जज़ीरा अरबी से बात करते हुए रवांची ने कहा है कि परमाणु समझौते पर अमल करने और अमरीका की उसमें फिर से वापसी के लिए नए सिरे से वार्ता शुरू करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि वाशिंगटन ने जेसीपीओए से निकलने के बाद ईरान पर जो प्रतिबंध लगाए थे, पहले उसे उन्हें हटाना होगा। अगर अगले तीन महीनों के दौरान प्रतिबंध हटा लिए जाते हैं तो ईरान भी अपने वादों पर पूर्ण रूप से पुनः अमल शुरू कर देगा।
रवांची का यह भी कहना था कि 2018 में अमरीका के इस समझौते से निकलने के एक साल बाद ईरान ने जवाबी कार्यवाही के तौर पर अपनी प्रतिबद्धताओं में कमी करना शुरू की थी।
ग़ौरतलब है कि ईरान ने जवाबी कार्यवाही के रूप में एक और क़दम उठाते हुए 23 फ़रवरी से एनपीटी के पूरक प्रोटोकोल पर अमल को रोक दिया है, जिसके बाद से आईएईए के निरीक्षक अब देश के परमाणु संयंत्रों का दौरा नहीं कर सकेंगे।
ईरान की संसद ने एक क़ानून पारित करके तेहरान सरकार से कहा था कि अगर 21 फ़रवरी तक अमरीकी प्रतिबंध नहीं हटाए जाते हैं तो आईएईए के साथ एडिशनल प्रोटोकोल के तहत किया जाने वाला सहयोग बंद कर दिया जाए।