10 फ़रवरी 2021 - 12:01
क्या ईरानी मोर्चे से क़रीब हो रही है बाइडन सरकार...इस्राईल, सऊदी अरब और इमारात को नाराज़ करने वाले बड़े फ़ैसलों से क्या संदेश देना चाहता है वाइट हाउस?

अमरीकी रक्षा मंत्रलय पेंटागोन के प्रवक्ता जान किर्बी ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि सीरिया में मौजूद अमरीकी सेना की ज़िम्मेदारी तेल की कुओं की हिफ़ाज़त करना नहीं है बल्कि उसका मिशन दाइश का मुक़ाबला है। इस बयान का इशारा साफ़ है कि अमरीका की बाइडन सरकार ईरान के नेतृत्व वाले प्रतिरोधक मोर्चे से क़रीब हो रही है और मध्यपूर्व के मामले में ट्रम्प सरकार की अधिकांश नीतियों से निजात पाना चाहती है।

हम यह नतीजा इसलिए भी निकाल रहे हैं कि अमरीका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने इस्राईल के ग़ैर क़ानूनी क़ब्ज़े वाले सीरियाई इलाक़े गोलान हाइट्स को इस्राईल का हिस्सा मानने से इंकार किया जिसे ट्रम्प सरकार ने इस्राईल का भाग क़रार दिया था। अमरीका ने इसके साथ ही सऊदी अरब के साथ हथियारों के सारे सौदे स्थगित कर दिए हैं और इमारात को भी एफ़-35 युद्धक विमानों की बिक्री के निर्णय पर पुनरविचार करने का एलान किया है।

ट्रम्प सरकार ने मध्यपूर्व के मामले में जो भी नीति बनाई वह पूरी तरह इस्राईल के फ़ायदे में थी, चाहे वह क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी और गोलान हाइट्स को इस्राईल का इलाक़ा स्वीकार करने की बात है या सीरिया के तेल संसाधनों को लूटने का मसला हो या फिर ईरान पर कठोर प्रतिबंध लगाने की बात हो।

सीरिया की जनता और सरकार ने अमरीका की इन नीतियों का डटकर मुक़ाबला किया। अगर सीरिया ने इतनी बहादुरी न दिखाई होती और इतनी क़ुरबानियां न दी होतीं तो शायद आज बाइडन सरकार ट्रम्प की नीतियों को रोल बैक न करती। सीरिया के तेल के कुओं पर अमरीकी सेना ने सीरियाई कुर्दों के माध्यम से क़ब्ज़ा कर रखा है और वहां इस्राईली तेल कंपनियां सक्रिय हैं।

अमरीका ने सीरियाई तेल के कुओं से दूर हटने का फ़ैसला तब किया है जब हालिया दिनों यह ख़बरें आ रही हैं कि सीरियाई सेना के साथ ही स्थानीय क़बीले भी तेल के कुओं को आज़ाद कराने के लिए अमरीकी सेना का मुक़ाबला करने की तैयारी में लग गए हैं। हमें तो यह लगता है कि बाइडन सरकार धीरे धीरे सीरिया से अपने सैनिकों को बाहर निकालने की बारे में सोच रही है।

ईरान के नेतृत्व वाला प्रतिरोधक मोर्चा मौजूदा हालात में सबसे ज़्यादा फ़ायदे में रहा है।  यह मोर्चा कठिन हालात में अपने आप को मज़बूत रखने और अपने क्षेत्रीय सहयोग को विस्तार देने की राह पर कामयाबी से बढ़ रहा है।

सीरियाई कुर्दों के बारे में हम यही कहेंगे कि यह समुदाय बार बार अमरीका और इस्राईल के झांसे में आता है और भारी नुक़सान उठाने के बाद पीछे हटने पर मजबूर होता है। यह हज़ार बार हो चुका है क्योंकि कुर्द पार्टियां पाठ लेने के लिए तैयार नहीं हैं।

आने वाले दिनों में बहुत सी चौंकाने वाली घटनाएं होंगी।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार