बुधवार को इस्लामी क्रांति की 42वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति रूहानी का कहना था कि व्हाइट हाउस के तानाशाह ट्रम्प के मुक़ाबले में ईरानी नता ने प्रतिरोध किया और अपने प्रतिरोध व धैर्य से उन्हें पराजित किया।
उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के तुरंत बाद ईरान भी इस समझौते से निकल जाता तो अमरीका और इस्राईल की साज़िश इतिहास के पन्नों पर आ जाती।
राष्ट्रपति रूहानी का कहना था कि ईरानी सरकार की रणनीति और जनता के प्रतिरोध के कारण ट्रम्प सरकार को काफ़ी अपमान झेलना पड़ा, इसलिए दुनिया भर के लोग ईरानी राष्ट्र के क़र्ज़दार हैं।