कोरोना वायरस की वजह से इस मुलाक़ात में कुछ वरिष्ठ वायु सेना कमान्डर ही शामिल हैं। इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ईरान के स्टैंड का एलान किया।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला ख़ामेनई ने दो टूक शब्दों में कहा कि परमाणु प्रतिबद्धताओं के पालन की ओर वापसी के लिए ईरान की शर्त, सारे प्रतिबंधों की समाप्ति है। इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता ने कहा कि परमाणु समझौते को जारी रखने के लिए जिस पक्ष को शर्त रखने का अधिकार है वह ईरान है और ईरान की शर्त यह है कि अमरीका सारे प्रतिबंधों को कागज़ पर नहीं बल्कि व्यवहारिक रूप से ख़त्म करे।

सुप्रीम लीडर ने कहा कि अगर पश्चिमी देश चाहते हैं कि ईरान अपनी परमाणु प्रतिबद्धताओं का फिर से पालन शुरू करे तो अमरीका को व्यवहारिक रूप से सारे प्रतिबंधों को ख़त्म करना होगा और हम हम सत्यापन करके देखेंगे कि सच में प्रतिबंध ख़त्म हो गये हैं, तब हम परमाणु प्रतिबद्धताओं की ओर लौटेंगे।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि पहली बात तो यह है कि ईरान में अमरीका और यूरोप की बकवास सुनने वाला कोई नहीं है और दूसरी बात यह है कि अगर हम तर्कसंगत बात करें तो अमरीका और तीन यूरोपीय देशों को जिन्होंने परमाणु समझौते में बयान की गई अपनी सारी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया, यह हक़ नहीं पहुंचता कि वह शर्तें रखें, उन्होंने किसी एक भी परमाणु प्रतिबद्धता पर अमल नहीं किया।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के बारे में अमरीके अनुमानों के ग़लत साबित होने का सिलसिला जारी है, अमरीकी अब भी ईरान राष्ट्र को सही ढंग से पहचान नहीं सके हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं ग़लतियों और मूर्खताओं का एक नमूना 2009 की अशांति के दौरान दिखाई दिया जब अमरीका के डेमोक्रेट राष्ट्रपति ने यह सोचकर उपद्रवियों का समर्थन किया था कि ईरान का काम तमाम है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना था कि अमरीका की मूर्खता का एक अन्य नमूना यह है कि उसने ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए अभूतपूर्व प्रतिबंध लगा दिए। उनका कहना था कि ट्रम्प सरकार के परले दर्जे के मूर्खों में से एक ने कहा था कि 2019 के नये साल का जश्न तेहरान में मनाएंगे, अब वह व्यक्ति इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया गया है और उसका राष्ट्रपति भी धक्के खाकर कर वाइट हाऊस से निकल गया, लेकिन इस्लामी गणतंत्र ईरान ईश्वर की कृपा से पूरी शक्ति और गौरव के साथ अपने पैरों पर खड़ा है।

ईरान की वायु सेना के वरिष्ठ कमान्डरों से मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ ने कहा कि वह लोग जो अमरीका की ताक़त का ग़लत आंकलन करते हैं, उन्हें अमरीका की हालिया घटनाओं से पाठ लेने की ज़रूरत है।
सुप्रीम लीडर ने कहा कि अमरीका में होने वाली हालिया घटनाएं कोई छोटा मुद्दा नहीं है और उन्हें एक मूर्ख राष्ट्रपति के पतन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इन घटनाओं को अमरीका की शक्ति, उसकी इज़्ज़त और सामाजिक व्यवस्था के बिखराव के रूप में देखा जाना चाहिए।

वरिष्ठ नेता ने अमरीका के बड़े राजनैतिक टीकाकारों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वह ख़ुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि अमरीका की सामाजिक व्यवस्था अंदर से टूटफूट का शिकार हो गयी है जबकि कुछ ने तो पोस्ट अमेरिकन युग की बातें तक शुरु कर दी हैं।

वरिष्ठ नेता का कहना था कि जैसी घटनाएं अमरीका में घटी हैं अगर वैसी घटनाएं दूसरे देशों विशेषकर उन देशों में घटतीं जिनसे अमरीका को समस्याएं हैं तो वह उनकी जान न छोड़ते।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि चूंकि मीडिया का साम्राज्य उनके अपने हाथ में है इसलिए वह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सब कुछ निपट गया जबकि मामला अभी ख़त्म नहीं हुआ है बल्कि जारी है।

आयतुल्लाह ख़ामेनई ने क्षेत्र में अमरीका पर निर्भर सरकारों विशेषकर ज़ायोनी शासन के भय, असमंजस और बेबुनियाद बयानबाज़ी के कारणों को बयान करते हुए कहा कि यह सब आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमरीका के वास्तविक पतन से पैदा होने वाले भय और परेशानी का नतीजा है।
यह मुलाक़ात वायु सेना द्वारा इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह के आज्ञापालन के एलान के अवसर पर हर साल होती है।