मंत्री ने कहा कि सीएए को 12 दिसम्बर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और 20 जनवरी, 2020 से यह अमल में आया है।
राय ने बताया कि नियम बनाने के लिए लोकसभा समिति ने 9 अप्रैल और राज्यसभा समिति ने 9 जुलाई तक का समय दिया है। सीएए के तहत नियम बनाने में एक साल से अधिक की देरी हो चुकी है।
सीएए के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है।
इस कानून के तहत इन समुदायों के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी जो इन तीन देशों में धार्मिक प्रताड़ता के कारण 31 दिसम्बर, 2014 से पहले भारत गये हैं।
इस क़ानून के दायरे से मुस्लिम समुदाय को बाहर रखने के चलते सीएए के ख़िलाफ़ देश व्यापी प्रदर्शन हुए।
दूसरी ओर गृह मंत्रालय ने एक संसदीय समिति से कहा है कि पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर "एनआरसी" लागू करने के बारे में केंद्र ने कोई फ़ैसला नहीं किया है।
असम में एनआरसी लागू की गई थी हालांकि इस कदम को लेकर पूरे भारत में विवाद खड़ा हो गया।
भाजपा के कई नेताओं ने पहले ऐसे बयान दिए हैं कि देश भर में एनआरसी लागू की जाएगी। संसदीय समिति ने पहले कहा था कि एनआरसी और जनगणना के संदर्भ में लोगों के बीच बहुत असंतोष और भय है।