31 जनवरी 2021 - 17:28
ईरान ने तेल अबीब को राख में बदल देने की धमकी क्यों दी? बाइडन के सत्ताकाल में इस भारी तनाव को हम किस नज़र से देखते हैं? क्या ईरान परमाणु क्लब की दहलीज़ पर पहुंच चुका है?

अनुमान तो यह था कि ट्रम्प सत्ता से जाएंगे और बाइडन वाइट हाउस में प्रवेश करेंगे तो पश्चिमी एशिया के इलाक़े में किसी हद तक शांति आएगी।

ख़ास तौर पर ईरान इस्राईल मोर्चे पर तनाव कुछ कम होगा। मगर ईरान और इस्राईल के बीच धमकियों और चेतावनियों के आदान प्रदान को देखा जाए तो अंदाज़ा होता है कि तनाव अपने चरम बिंदु की ओर से बढ़ता जा रहा है। ज़मीन पर सेनाओं का जमावड़ा भी बढ़ रहा है। अमरीका ने फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अपनी छावनियों पर इस्राईली मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम आयरन डोम लगा दिया है। अमरीकी सेना की सेंट्रल कमांड के आप्रेशन रूम में इस्राईली सैनिक अफ़सरों को शामिल किया गया है। फार्स खाड़ी के पानी में अमरीकी युद्धक जहाज़ों और आसमान में अमरीकी बम वर्षक विमानों की गतिविधियां बढ़ रही हैं।

इस्राईली सेना के चीफ़ आफ़ स्टाफ़ जनरल अवीव कोख़ाफ़ी ने कुछ दिन पहले एक बयान देकर सबको चौंका दिया। उन्होंने बिल्कुल अनोखे प्रकार की धमकी देते हुए कहा कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों और मूल प्रतिष्ठानों पर हवाई और मिसाइल हमले हो सकते हैं। उन्होंने दक्षिणी लेबनान और गज़्ज़ा पट्टी में रहने वालों को नसीहत भी दे डाली कि वह मिसाइल भंडारों के क़रीब स्थित अपने घरों से दूर चले जाएं। उन्होंने ज़ोर दिया कि इस धमकी को गंभीरता से लिया जाए।

ईरानी सेना के ज्वाइंट स्टाफ़ के प्रवक्ता जनरल अबुल फ़ज़्ल शिकारची ने इस धमकी के जवाब में कहा कि ईरान पर कोई भी हमला हुआ तो तेल अबीब और हैफ़ा को राख के ढेर में बदल दिया जाएगा, अगर इस्राईली विमानों ने ईरान के किसी भी प्रतिष्ठान को निशाना बनाया तो उन्हें पूरे इलाक़े में लैंडिंग के लिए कोई एयरपोर्ट सुरक्षित नहीं मिलेगा।

ईरानी फ़र्सेज़ ने दो सप्ताह पहले हिंद महासागर और अरब सागर में ज़मीनी हवाई और समुद्री अभ्यास किया जिसमें उन नए मिसाइलों का अनावरण किया गया जो युद्धक नौकाओं को बड़ी सफलता से ध्वस्त कर देते हैं। इस अभ्यास में आत्मघाती ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए। तेज़ रफ़्तार युद्धक नौकाओं और आधुनिक पनडुब्बियों ने भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।

धमकी भरे बयान केवल सैनिक अफ़सरों तक सीमित नहीं रहे बल्कि अमरीकी और ईरानी कूटनयिकों ने भी इस शब्दिक युद्ध में हिस्सा लिया। अमरीका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि ईरान परमाणु समझौते में वापस लौटे ताकि वार्ता शुरू हो सके इसके जवाब में ईरान की संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति आयोग के प्रमुख मुजतबा ज़ुन्नूरी ने कहा कि सरकार परमाणु समझौते का पालन पूरी तरह रोक दे और तब तक इस पर अमल न करे जब तब अमरीका अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल करना शुरू न कर दे। उन्होंने कहा कि केवल यही भाषा अमरीकियों की समझ में आती है।

हो सकता है कि कोई कहे कि यह धमकियां क़रीब आ चुकी वार्ता की भूमिका है। दोनों पक्ष अपनी मांगों का स्तर ऊपर ले जाना चाहते हैं और मज़बूत पोज़ीशन में नज़र आना चाहते हैं। मगर इस बीच इस्राईली जनरल के बयान से साफ़ ज़ाहिर है कि इस्राईल बुरी तरह डर गया है। क्योंकि ट्रम्प के सत्ता से चले जाने के बाद ईरान पर हमला करने का अवसर उसके हाथ से निकल गया है।

ईरान के क़रीबी सूत्र बताते हैं कि ईरान युद्ध की शुरुआत तो नहीं करेगा लेकिन हमला हो जाने की स्थिति में वह सीरिया, लेबनान, इराक़, यमन और ग़ज़्ज़ा पट्टी में अपने घटकों के साथ मिलकर जब जवाब देगा तो फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में अमरीकी छावनियों और इस्राईल में भारी विनाशलीला देखने में आएगी। इसकी बानगी इराक़ में अमरीका की एनुल असद छावनी में नज़र आ चुकी है।

अमरीकी विदेश मंत्री ने अपनी पहली प्रेस कान्फ़्रेन्स में बहुत बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु बम बनाने से केवल तीन या चार महीने की दूरी पर है।

इकानामिस्ट मैगज़ीन ने ईरान के परमाणु उद्देश्यों के बारे में बहुत विस्तार से लिखा है। मैगज़ीन पहले भी लिख चुका है कि ईरान के पास संवर्धित यूरेनियम का जो भंडार है उससे ईरान दो परमाणु बम बना सकता है।

ईरान की परमाणु ताक़त के बारे में पश्चिमी देशों की बयानबाज़ी केवल वार्ता की मेज़ पर लौटने की तैयारी है या युद्ध की बहानेबाज़ी? इस सवाल का जवाब हमारे पास नहीं है मगर आने वाले दिनों में इस संदर्भ में बहुत कुछ सामने आएगा।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार