दिल्ली में होने वाले विस्फोट के बारे में कुछ तथ्य ध्यान योग्य हैंः
सब से पहली बात तो यह है कि पुलिस प्रवक्ता के अनुसार इस्राईली दूतावास के निकट जो बम धमाका हुआ है वह देसी बम से हुआ था और इस बारे में विभिन्न अटकलों के बावजूद भारतीय विदेशमंत्रालय ने इस धमाके पर अपनी प्रतिक्रिया प्रकट नहीं की है।
दूसरी बात यह है कि शुक्रवार को दिल्ली में यह धमाका उस समय हुआ जब भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री धमाका स्थल से कुछ ही दूर एक कार्यक्रम में मौजूद थे। यह धमाका एेसे समय में हुआ जबक किसान आंदोलन का ज़ोर है और कई महीनों से धरने पर बैठे किसान, भारतीय इतिहास का सब से बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक किसानों और सरकार के बीच होने वाली कई चरण की वार्ताओं का कोई परिणाम नहीं निकला है। सरकार किसी भी हालत में नये कानूनों को वापस लेने पर तैयार नहीं है।
एक और बात यह है कि यह विस्फोट, भारत और इस्राईल के बीच संबंध स्थापना की 29वीं वर्षगांठ पर हुआ है और भारत में इस्राईली राजदूत का कहना है कि हम हमले के ज़िम्मेदारों और कारणों का पता लगाने के लिए भारत सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। नयी दिल्ली में पहले भी इस प्रकार का हमला हो चुका है। 13 फरवरी सन 2012 में भी इस्राईली दूतावास की एक अधिकारी की कार में बम लगाया गया था जिसके धमाके से वह अधिकारी घायल हो गयी थी।
चौथी बात यह है कि इस्राईल, भारत को एशिया में अपना स्ट्रेटजिक घटक समझता है इसी लिए नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत और इस्राईल के संबंधों में विस्तार हुआ है। वैसे यह कोई हैरत की बात भी नहीं है क्योंकि नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने से पहले ही वाशिंग्टन और नयी दिल्ली के अध्ययन केन्द्रों ने यह अनुमान लगा लिया था कि नरेन्द्र मोदी के सत्ताकाल में भारत और इस्राईल के संबंध एक बार फिर खुल कर सामने आएंगे। वास्तव में इस्लाम, पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ तथा व्यापार के समर्थन में मोदी सरकार का रुख इस बात का कारण बना है कि उसके इस्राईल के साथ सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में संबंध गहरे हों। इसी लिए बहुत से टीकाकारों का कहना है कि भारत में भाजपा के सत्ता काल में इस्राईल के प्रति भारत के रवैये में बड़ा बदलाव आया है।
कुल मिलाकर भले ही इस हमले की ज़िम्मेदारी इधर उधर के कुछ गुटों द्वारा ली जा रही है लेकिन अगर भारत और इस्राईल इस हमले को आतंकवादी हमला बता कर उसे अपने विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना बनाएं तो इस पर किसी को हैरत नहीं होगी। वैसे दिल्ली में किसानों के प्रदर्शनों पर क़ाबू पाने के लिए भी इस धमाके को इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी आशंका है कि इस्राईल के साथ संबंध बनाने से पाकिस्तान के कड़े शब्दों में इन्कार की वजह से इस्लामाबाद को भी इस धमाके में घसीटा जा सकता है लेकिन यह भी सच्चाई है कि चूंकि यह धमाका इस्राईली दूतावास के निकट हुआ है और इस्राईल भी जांच में शामिल है इस लिए हमले का ठीकरा इस्राईल के किसी भी दुश्मन के सिर फोड़ा जा सकता है।