मंगलवार की शाम सेनेट में विदेशी मामलों की समिति के सामने बयान देते हुए ब्लिंकन ने कहा कि हम यहीं से शुरू करना चाहते हैं और इससे भी अधिक मज़बूत समझौते के लिए कोशिश करेंगे और अपने घटकों को दोबारा अपने साथ लाएंगे। उन्होंने कहा कि समझौते में ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और पश्चिमी एशिया के देशों में ईरान की गतिविधियों का मुद्दा भी शामिल किया जाना चाहिए।
ईरान इस मामले में साफ़ कर चुका है कि उसे परमाणु समझौते में अमरीका की वापसी पर कोई आग्रह और जल्दबाज़ी नहीं है बल्कि ईरान का यह मुद्दा ही नहीं है कि अमरीका परमाणु समझौते में लौटता है या नहीं। ईरान के सामने मुख्य मुद्दा यह है कि ईरान पर लगे सारे प्रतिबंध हटें।
ईरान ने यह भी साफ़ कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी शक्ति से जारी रहेगा और क्षेत्र में अपने घटकों की मदद का सिलसिला भी चलता रहेगा।
फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर ब्लिंकन ने कहा कि इस विवाद का एक ही स्थायी समाधान हो सकता है कि दो देशों की स्थापना हो मगर अल्पावधि में यह लक्ष्य प्राप्त कर पाना कठिन है। ब्लिंकन ने इसके साथ यह भी कहा कि बैतुल मुक़द्दस इस्राईल की राजधानी रहेगा और अमरीकी दूतावास वहीं पर मौजूद रहेगा।
यमन युद्ध के बारे में ब्लिंकन ने कहा कि अंसारुल्लाह आंदोलन या हूती संगठन को आतंकी संगठन घोषित करने के फ़ैसले पर पुनरविचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले पर हम पुनरविचार पर ज़ोर देंगे ताकि यमन को भेजी जा रही मानवीय सहायताओं में रुकावट न आए।
स्रोतः अजज़ीरा