ख़ालिद अत्ताई ने कहा कि देश की संसद में पारित बिल के मुताबिक़, अमरीकी फ़ोर्सेज़ को निकालना चाहिए।
अलअहद न्यूज़ के मुताबिक़, इराक़ की उच्च इस्लामी परिषद के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार का गंभीर न होना, क़ाबिज़ अमरीकी फ़ोर्सेज़ को इराक़ से निकालने वाले बिल के लागू होने में देर होने की एक वजह है।
उन्होंने हश्दुश शाबी के प्रमुख फ़ालेह अलफ़य्याज़ के ख़िलाफ़ अमरीकी पाबंदी को, शहीद क़ासिम सुलैमानी और शहीद अबू मेहदी अलमुहन्दिस की शहादत की पहली बरसी पर उसकी प्रतिक्रिया बताया। ख़ालिद अत्ताई ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रतिरोध के कमांडरों की हत्या के ज़रिए अपने विचार में क्षेत्र में अमरीकी वर्चस्व को थोपना चाहते हैं।
दूसरी ओर इराक़ के इस्लामी आंदोलन के महासचिव शबल अज़्ज़ैदी ने फ़ालेह अलफ़य्याज़ पर अमरीका की ओर से पाबंदी की निंदा की और इसे फ़ालेह अलफ़य्याज़ के लिए मेडल की तरह बताया जिससे पता चलता है कि उन्होंने जो रास्ता अबतक तय किया वह पूरी तरह सही था।
ग़ौरतलब है कि अमरीकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इराक़ी स्वंयसेवी बल हश्दुश शाबी के प्रमुख पर पाबंदी लगाने का एलान किया।
ग़ौरतलब है कि 3 जनवरी 2020 को जनरल क़ासिम सुलैमानी और अबू महदी अलमोहन्दिस के बग़दाद में अमरीका के आतंकवादी हमले में शहीद होने के बाद, इराक़ी संसद में एक बिल पास हुआ जिसमें देश से अमरीकी फ़ौजियों को निकाल बाहर करने पर सहमति हुयी है।