अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई राष्ट्रपति अपनी हार मानने को तैयार ही नहीं है। अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट में हाल ही में ऐसे दो लेख छपे हैं जिनकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है। एक में डोनल्ड ट्रम्प की उस फोन रिकॉर्डिंग का ज़िक्र है जिसमें वे जॉर्जिया प्रांत के शीर्ष चुनाव अधिकारी ब्रैड रैफ़ेनस्पेर्गर पर ग़ुस्सा उतार रहे हैं और उनसे अपनी जीत के लिए ज़रूरी क़रीब 12 हज़ार वोटों का इंतेज़ाम करने को कह रहे हैं, तो, दूसरी ओर अमेरिका के सभी जीवित 10 पूर्व रक्षामंत्रियों ने सेना को चुनावी विवाद से दूर रहने की चेतावनी दी है। ऐसा भी अमेरिकी इतिहास में पहली बार ही हुआ है कि पूर्व रक्षा मंत्रियों को मिल कर सेना के लिए इस तरह का बयान जारी करना पड़ा हो। पूर्व रक्षा मंत्रियों के बयान में आया है कि सेना द्वारा उठाया गया कोई भी क़दम "ख़तरनाक, ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक" होगा। दरअसल 20 जनवरी को अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन शपथ ग्रहण करेंगे। नवंबर से अब तक ट्रम्प जिस तरह की कोशिशें करते रहे हैं, उन्हें देखते हुए बहुत से लोगों को शक है कि शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले ट्रम्प कोई नया पैंतरा अपना सकते हैं।

हालांकि अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्रियों ने अपने लेख में एक बार भी ट्रम्प का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने लिखा कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद बार-बार वोटों की दोबारा गिनती कराई गई, अदालत को भी बीच में लाया गया लेकिन नतीजा नहीं बदला। उन्होंने लिखा है, "नतीजों पर सवाल उठाने का वक़्त अब ख़त्म हो चुका है।" पूर्व रक्षा मंत्रियों ने चिंता व्यक्त की कि नतीजों को पलटने की कोशिश में सेना का इस्तेमाल किया जा सकता है, "चुनावी विवाद को निपटाने के लिए अगर अमेरिकी सेना का इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी तो यह हमें एक ख़तरनाक, ग़ैरक़ानूनी और असंवैधानिक क्षेत्र में पहुंचा देगा, जो नागरिक और सैन्य अधिकारी ऐसा करेंगे या करने को कहेंगे, उन्हें हमारे गणतंत्र पर अपराध करने के जुर्म में सज़ा के लिए तैयार रहना होगा।" इस लेख के छपने से पहले भी उच्च सैन्य अधिकारी खुल कर यह बात कहते रहे हैं कि सेना की ज़िम्मेदारी संविधान के प्रति है, किसी एक नेता या राजनीतिक दल के प्रति नहीं। यह बात भी दिलचस्प है कि जिन पूर्व रक्षा मंत्रियों ने इस लेख पर दस्तखत किए हैं वे डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों से नाता रखते हैं। इनमें डिक चेनी, विलियम पेरी, डॉनल्ड रम्सफेल्ड, विलियम कोहेन, रॉबर्ट गेट्स, लियोन पनेटा, चक हेगल, ऐश कार्टर, जेम्स मैटिस और मार्क एस्पर शामिल हैं। जेम्स मैटिस डोनल्ड ट्रम्प के पहले रक्षा मंत्री थे। 2018 में उन्होंने इस्तीफ़ा दिया, जिसके बाद एस्पर को यह पद सौंपा गया लेकिन 3 नवंबर को हुए चुनाव के कुछ ही दिन बाद ट्रम्प ने उन्हें इस पद से हटा दिया।

उल्लेखनीय है कि, वॉशिंगटन पोस्ट द्वारा ही जारी की गई डोनल्ड ट्रम्प की ऑडियो क्लिप भी खूब चर्चा में हैं जिसमें वे जॉर्जिया के मुख्य चुनाव अधिकारी पर दबाव बनाते हुए कह रहे हैं, "जॉर्जिया के लोग ग़ुस्से में हैं, इस देश के लोग ग़ुस्से में हैं.. मैं सिर्फ इतना चाहता हूं, मैं सिर्फ 11,780 वोट ढूंढना चाहता हूं क्योंकि हम जीते हैं।" इस ऑडियो क्लिप के सार्वजनिक होने से कुछ ही घंटे पहले ट्रम्प ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि उन्होंने रैफेनस्पेर्गर के साथ फोन पर चुनाव में धांधली पर चर्चा की है। उन्होंने लिखा कि चुनाव अधिकारी "वोटर फ्रॉड" के बारे में उनके सवालों के कोई जवाब नहीं दे पाए, "उसे तो कुछ पता ही नहीं है।" ग़ौरतलब है कि 3 नवंबर 2020 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रम्प को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा है,जिसके बाद से वह लगातार चुनाव में धांधली का आरोप लगा रहे हैं और व्हाइट हाउस छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन को 306 और ट्रम्प को 232 वोट मिले थे।