जनरल बाक़ेरी ने कहा कि दुश्मन का मक़सद यह है कि ईरानी राष्ट्र, अमरीका की थोपी गयी नीतियों को स्वीकार कर ले, वह ईरान को वार्ता की मेज़ पर घसीटना चाहता हैं और इस तरह की वार्ता का नतीजा पहले से ही स्पष्ट है, इस तरह की बात चीत का मतलब, अमरका के सामने ईरान का घुटने टेकना है और यह हमारे देश की व्यवस्था से मेल नहीं खाता।
जनरल बाक़ेरी ने कहा कि आज इस्लामी गणतंत्र ईरान ने इलाक़े के मुद्दों को अपने हाथ में ले रखा है तो ज़ाहिर सी बात है कि उसे विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान अन्य लोगों की भूमि पर नज़र डाले बिना, केवल अपने धार्मिक कर्तव्यों के आधार पर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान चीफ आफ स्टाफ ने कहा कि अमरीका और साम्राज्यवादी शक्तियां हम पर दबाव डाल कर प्रतिबंध लगा कर और हमारे लिए समस्याएं पैदा करके हमें झुकाना चाहती हैं ताकि हम अपनी क्रांति और व्यवस्था के विपरीत उनकी बातों को स्वीकार कर लें लेकिन हम ने सक्रिय प्रतिरोध का रास्ता अपनाया और हालांकि हमारे देश पर दबाव बहुत भारी है लेकिन उसके अच्छे परिणाम भी निकले हैं और हम अब कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भर हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी ताक़त आज कल बढ़ रही है, हम अपने पैरों पर खड़े हैं और अपने लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। हमारा देश एसे इलाक़े में है जहां अगर हम मज़बूत न होंगे तो निश्चित रूप से हार जाएंगे।
जनरल बाक़ेरी ने कहा कि अनुभवों से साबित हुआ है कि दुश्मन जब खुद को कमज़ोर देखता है तो पीछे हट जाता है, अगर अमरीकी ड्रोन को पिछले साल जब निशाना बनाया गया तो दुश्मन जवाब देने या न देने के बारे में सोचने पर मजबूर हुआ और फिर जवाब न देने का फैसला किया तो यह उसके डर के अलावा और कुछ नहीं है। अमरीका को पता है कि युद्ध का अंत उसके हाथ में नहीं होगा और हम यह निर्धारित करेंगे कि किसी संभावित झड़प में अमरीका को कितना नुक़सान पहुंचना है।