विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में सबसे ज़्यादा हथियार बेचने वाले देश के रूप में अमरीका की कड़ी आलोचना की और कहा कि शायद कुछ लोग पैसों के ज़ोर पर जटिल हथियारों की ख़रीददारी कर लें लेकिन हक़ीक़त यह है कि शांति और स्थिरता पैसों के ज़ोर पर नहीं ख़रीदी जा सकती।
उधर संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के स्थाई राजदूत मजीद तख़्त रवान्ची ने खुले शब्दों में कहा है कि तीनों द्वीप ईरान के हैं और ईरान के ही रहेंगे।
उन्होंने बल दिया कि ईरान, क्षेत्र में शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में शामिल रहेगा। उनका कहना था कि तीनों द्वीप बू मूसा, तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग, ईरान के थे और हमेशा से ईरान के ही रहेंगे।
उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र संघ की वर्चुअल बैठक में क्षेत्र के कुछ देशों द्वारा ईरान पर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान, फ़ार्स की खाड़ी के क्षेत्र में शांति और स्थिरता की स्थापना, व्यापारिक लेनदेन और ऊर्जा की आपूर्ती में अहम भूमिका अदा कर रहा है और भविष्य में भी इसी प्रकार क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ाने में मदद करता रहेगा।
मजीद तख़्त रवान्ची ने इस बैठक में क्षेत्र के अरब देशों से अपील की कि वे वार्ता द्वारा अपने मतभेदों को हल करें। उनका कहना था कि क्षेत्र के देशों की पहली प्राथमिकता परस्पर विश्वास बहाली, दूसरे देशों की अखंडता का सम्मान करना, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और क्षेत्र को ज़्यादा से ज़्यादा शांतिपूर्ण बनाने के लिए आपसी सहयोग को मज़बूत बनाना होनी चाहिए।