20 अक्टूबर 2020 - 19:56
इस्राईल से दोस्ती की वकालत करने वाले अरब नेताओं पर भड़के ओमान के वरिष्ठ मुफ़्ती, यह व्यक्तिगत स्टैंड है या नई दिशा में जा रही है मसक़त सरकार?

अपेक्षा के बिल्कुल विपरीत ओमान के वरिष्ठ मुफ़्ती अहमद बिन हमद अलख़लीली ने अपने ट्वीट से सबको चौंका दिया। उन्होंने ग़ैर क़ानूनी इस्राईली शासन से दोस्ती के लिए कुछ अरब सरकारों की बेताबी की निंदा कर दी।

अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या ओमान की सरकार ने भी इस्राईल के साथ इमारात और बहरैन के शांति समझौतों का समर्थन करने से इंकार कर दिया है या यह मुफ़्ती का व्यक्तिगत स्टैंड है?

अहमद बिन हमद अलख़लीली ने ट्वीट किया कि इस्लामी जगत में एक नई नकारात्मक बात देखने में आ रही है कि उस दुश्मन से मुहब्बत जताई जा रही है जिसे दुशमन समझने का आदेश हमें अल्लाह ने दिया है। बड़ी बेशर्मी से एलानिया इस पर गर्व भी किया जा रहा है। कुछ बड़े नेता भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं जिनका अतीत काफ़ी उज्जवल रहा है, वह भी एसे नारे लगा रहे हैं जो उन्हें उनके आक़ाओं से क़रीब करें।

ओमान के मुफ़्ती का इशारा फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों के शासकों की ओर था।

इस ट्वीट के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि नए नरेश सुलतान हैसम के नेतृत्व में क्या ओमान अलग दिशा में जाना चाहता है और मुफ़्ती को माध्यम बनाकर मसक़त सरकार ने अपना संदेश दे दिया है।

मुफ़्ती अलख़लीली के स्टैंड की सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने निंदा की और लिखा कि अभी सबको अच्छी तरह याद है कि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने मसक़त की यात्रा की थी और जब ओमान के नरेश सुलतान क़ाबूस का निधन हो गया तो सांत्वना संदेश देने वालों में नेतनयाहू भी आगे आगे थे। मगर इस प्रकार के किसी भी अवसर पर मुफ़्ती अलख़लीली ने कोई बयान नहीं दिया था। मगर बड़ी संख्या में यूज़र्स ने मुफ़्ती अलख़लीली के साहसिक बयान की तारीफ़ की है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि ओमान अलग दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।