टीकाकारों का कहना है कि ईरान के ख़िलाफ़ हथियारों के प्रतिबंध की समाप्ति और इसी तरह इस प्रतिबंध की समय सीमा बढ़वाने की कोशिश में अमरीका की हार, ईरान की एक बहुत बड़ी कूटनैतिक जीत है। इसका एक बड़ी नतीजा यह भी निकला है कि यूरोपीय देश, अमरीका के एकपक्षवाद के जाल से निकल गए हैं, इस प्रकार से व्यवहारिक रूप से और पहली बार अमरीका को संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में मुंह की खानी पड़ी है।
टीकाकारों का यह भी कहना है कि ईरान के ख़िलाफ़ हथियारों की पाबंदी ख़त्म करने का फ़ैसला, एक नई बहुध्रुवीय व्यवस्था के अस्तित्व में आने की शुरुआत है लेकिन ईरान की कूटनीति की जीत की वजह, अमरीका की ज़ोर-ज़बरदस्ती से मुक़ाबला करने के संबंध में ईरान की योजना की सफलता और साथ ही गुट पांच धन एक से उसका सहयोग है। ईरान की कूटनीति की यह विजय अमरीकी कूटनीति के मुंह पर ज़न्नाटेदार थप्पड़ के अर्थ में है जो विश्व मंच पर हार चुकी है।
ईरान की जीत का एक पहलू यह भी है कि वह पहली बार अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहा है। टीकाकारों का कहना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य 11 देश ईरान के ख़िलाफ़ लगे हुए हथियारों के प्रतिबंध की समय सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर वोटिंग में तटस्थ रहे, यह ईरान के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है। ईरान इस चरण में दुनिया के सामने अपना हक़ स्पष्ट करने में सफल रहा और साथ ही उसने यह भी प्रमाणित किया कि उसने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन किया है। इस तरह वह एक सक्रिय सदस्य के रूप में विश्व समुदाय में लौट आया।
राजनैतिक टीकाकारों का मानना है कि रविवार का दिन, न केवल ईरान के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अहम व निर्णायक दिन है और अब समान कोणों वाला एक ऐसा त्रिकोण अस्तित्व में आ चुका है जिसके एक कोण पर अमरीका, दूसरे पर ईरान और तीसरे पर यूरोपीय संघ व पूरी दुनिया है। अगर ईरान ने अपनी कूटनीति में अपना पूरा अनुभव व युक्तियां न लगा दी होतीं तो आज दुनिया के सामने यह निर्णायक दिन न आता। ईरान की कूटनैतिक शक्ति बड़ी होशियारी से आगे की ओर बढ़ रही है और उसकी इसी होशियारी की वजह से यूरोपीय देश, जिन्होंने परमाणु समझौते पर दस्तख़त किए थे, अब इस समझौता का भरपूर समर्थन कर रहे हैं।
यूरोप पहली बार, दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अपने सबसे बड़े और सबसे अहम घटक यानी अमरीका के सामने खड़ा हो गया है और उसने उसके ख़िलाफ़ वोट दिया है। टीकाकारों का कहना है कि यह बड़ा ऐतिहासिक पल है और ईरान के संयम और मध्यपूर्व में शक्ति का संतुलन बदलने विशेष कर ईरान के साथ सहयोग के माध्यम से रूस के एक अहम खिलाड़ी के रूप में सामने आने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में कुछ अहम बदलाव आ रहे हैं जिनसे अमरीका भागने की कोशिश कर रहा है।
ऐसा लगता है कि विश्व स्तर पर नए समीकरण सामने आने के बाद अमरीका के बहुत से क़रीबी साथी, वाॅशिंग्टन की ओर से परमाणु समझौते का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों व अधिकारों का हनन किए जाने के कारण चिंतित हो गए हैं और इसी लिए यूरोप ने संयुक्त राष्ट्र संघ व सुरक्षा परिषद में अमरीका की इच्छा का विरोध किया है और ईरान के ख़िलाफ़ हथियारों का प्रतिबंध जारी रखने के अमरीकी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ वोट दिया है।