एडमिरल हुसैन ख़ानज़ादी ने ईरान से हथियारों के प्रतिबंध समाप्त होने पर नौसेना द्वारा विदेशों से हथियार खरीदे की योजना के बारे में पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हथियारों का प्रतिबंध, हमारी नौसेना के लिए एक मज़ाक था।
एडमिरल खानज़ादी ने इसब ात का उल्लेख करते हुए कि किसी ज़माने में ईरान को कल पुर्ज़ों के लिए आयात की ज़रूरत थी लेकिन आज जब हथियारों का प्रतिबंध खत्म हो गया है तो अब उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि प्रतिबंधों की वजह से हमारी नौसेना वह सब कुछ बनाती है जिसकी उसे ज़रूरत होती है।
नौसेना प्रमुख ने इसी प्रकार बल दिया कि ईरान में बनाये गये हथियार, उच्च तकनीक और क्वालेटी के होते हैं और मूल्य उचित होता है इसी लिए इस बात की बहुत संभावना है हथियारों के बाज़ार में ईरानी हथियारों का स्वागत किया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 के अनुसार 18 अक्तूबर से ईरान पर हथियारों का प्रतिबंध खत्म हो गया जिसके बाद ईरान जिससे चाहे हथियार खरीद और जिसे चाहे हथियार बेच सकता है।