सारे कूटनयिक शिष्टाचारों का छोड़ कर ईरान के बारे में बहुत अधिक गुस्से में और अभद्र भाषा के साथ ट्रम्प के बयानों से यहपता चलता है कि आज कल ट्रम्प के लिए सब से बड़ी परेशानी ईरान है।
बहुत से लोगों का मानना है कि यह जो ट्रम्प ने कहा है कि “ ईरानी कोई ऐसा काम न करें जिसकी वजह से मुझे वह करना पड़े जो अब तक नहीं किया है, “ उससे खुद यह पता चलता है कि ट्रम्प की चुनावी टीम को यह डर है राष्ट्रपति चुनाव में उन पर निर्णायक चोट ईरान की ओर से हो सकती है न कि डेमोक्रेटों की ओर से।
ट्रम्प के अपमानजनक बयान पर ईरानियों की अर्थपूर्ण चुप्पी ने अमरीकी अधिकारियों को और अधिक चिंता में डाल दिया है।
दुनिया को आज भी याद है कि किस तरह से ईरान में बंधक बनाए गये अमरीकियों को रिहा कराने में जिमी कार्टर नाकाम रहे थे। जिमी कार्टर ने बहुत कोशिश की थी कि इन बंधकों को राष्ट्रपति चुनाव से पहले रिहा करा लें लेकिन ईरानियों ने उन्हें उस दिन रिहा किया जब रोनाल्ड रीगन ने सत्ता संभाली ताकि पूरी दुनिया को यह बता सकें कि जिमी कार्टर को वाइट हाउस से निकालने वाले ईरानी थे।
विदेश नीतियों में ट्रम्प की विफलता किसी से ढकी छुपी नहीं है लेकिन आज कल उन की मुख्य समस्या, उनकी आतंरिक नीतियां हैं जिनकी वजह से उनके डेमोक्रेटिक प्रतिस्पर्धा आगे निकल गये हैं।
निश्चित रूप से आज कल ट्रम्प का सारा ध्यान आंतरिक नीतियों पर है और हिलैरी क्लिंटन के ईमेल का प्रकाशन दर अस्ल इसी लिए था जिसे अक्तूबर का बम कहा जा रहा था मगर अब लगता है कि अमरीका के भीतर उस पर खास ध्यान नहीं दिया गया।

इन हालात में ट्रम्प को यह चिंता सता रही है कि कहीं ईरानी, स्वंय या अपने किसी घटक की मदद से मध्य पूर्व में कोई ऐसा क़दम न उठा लें जो उनके बेजान चुनावी अभियान के ताबूत में आखिरी कील साबित हो जाए।
यही वजह है कि इराक़ी सरकार की कोशिशों के बाद अमरीकी, इराक़ के प्रतिरोधक गुटों के साथ एक प्रकार के युद्ध विराम पर तैयार हो गये और यह भी वादा किया कि इराक़ से अपने सैनिकों की वापसी के कार्यक्रम की घोषणा कर दें।
इसी तरह हालांकि आज़रबाइजान में अमरीकियों के बहुत से हित हैं लेकिन वह इस युद्ध में सीधे फंसने से बच रहे हैं।
दूसरी तरफ तालिबान के साथ भी एक प्रकार से युद्ध विराम चाह रहे हैं ताकि अमरीकी सैनिकों पर उनके हमले बंद हो जाएं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर ट्रम्प और उनकी टीम की नाकामी की हद यह है कि वह इस्लामी जगत में अपने दो महत्वपूर्ण कार्डस यानि यूएई और बहरैन को भी जलाने पर तैयार हो गये इस उम्मीद में कि इस से मिस्टर ट्रम्प की लोकप्रियता बढ़ेगा मगर उससे भी कुछ नही हुआ।

अमरीका का एक बड़ी कमज़ोरी यह है कि उसके दसियों हज़ार सैनिक परशियन गल्फ और सीरया में मौजूद हैं जिन्हें नुक़सान पहुंचाना बेहद आसान है और इस मामले में ईरान और उसके दोस्तों के हाथ काफी खुले हैं।
इसी तरह इस बात की भी आशंका है कि अचानक ही सऊदी अरब और इस्राईल जैसे अमरीका के घटकों पर बड़ा हमला हो जाए या कोई युद्ध छिड़ जाए या फिर यह लोग ही ऐसा ही कोई काम कर दें जिसकी वजह से उनके खिलाफ युद्ध शुरु हो जाए तो इस दशा में भी चूंकि अमरीका उनका समर्थक है, अमरीकी सरकार की पोज़ीशन कमज़ोर हो जाएगी।
इस बात के दृष्टिगत कि सऊदी अरब और यूएई आज कल बुरी तरह से यमन में फंसे हैं और इस्राईल भी हर रोज़ सीरिय और फिलिस्तीन में हंगामा करता रहा रहता है, इस बात की बहुत आशंका है कि ईरानियों ने कोई योजना न भी बनायी हो तब भी अचानक हालात खराब हो जाएं और सारे समीकरण बिगड़ जाएं और अगर ऐसा कुछ होता है तो इसका सीधा नुक़सान ट्रम्प को होगा और दोबारा अमरीका का राष्ट्रपति बनने का उनका सपना चकनाचूर हो जाएगा।
आज कल जो चीज़ बिल्कुल स्पष्ट है वह यह है कि ट्रम्प रात से सुबह तक और सुबह से रात तक जनरल सुलैमानी के अभिशाप का भयानक सपना देखते हैं।