याचिका दायर करने वाले का कहना था कि इस्लामी तरीक़े से हलाल करना बेहद दर्दनाक है और युरोपीय अदालतों ने भी माना है कि यह तरीक़ा पीड़ादायक होता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मांस के लिए जानवरों को हलाल करने पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अखंड भारत मोर्चा के वकील से कहा है कि यह याचिका शरारत से भरी लगती है और कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं करता कि कौन शाकाहारी हो, कौन मांसाहारी और न ही हम तय करेंगे कि कौन हलाल मीट खाएगा, कौन झटका।
भारतीय सत्रों के अनुसार याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस संजय कृष्ण कौल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट इस पर सुनवाई नहीं करता कि कौन शाकाहारी हो, कौन मांसाहारी. जिसे हलाल मीट खाना है वो खाए, जिसे झटका मीट खाना है वह झटका मीट खाए।
दर अस्ल अखंड भारत मोर्चा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मुर्गे, बकरे और अन्य पशुओं को खाने के लिए इस्लाम के नियमानुसार हलाल तरीके से काटने पर रोक लगाने की मांग की गयी थी। इसके साथ ही अखंड भारत मोर्चा ने केंद्र सरकार की 30 मार्च के सर्कुलर पर रोक लगाने की भी मांग की थी । इस याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार के पशुपालन मंत्रालय ने मांस कारोबारियों के दबाव में आकर 30 मार्च को ये सर्कुलर जारी किया था। पशुपालन मंत्रालय ने यह जल्दबाजी में जारी किया था लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है।