12 अक्टूबर 2020 - 16:39
योगी और उनके जैसे लोग दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों को इंसान ही नहीं मानते, इसलिए उनके साथ जो भी हो उन्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है

पिछले महीने के अंत में सामूहिक रेप पीड़िता 19 वर्षीय दलित लड़की की मौत हो गई, जिसे रेप के अलावा बुरी तरह से मारा पीटा गया था, यहां तक कि उसकी रीढ़ की हड्डी तक तोड़ दी गई थी।

तमाम सुबूत भी पीड़िता के बयान की पुष्टि कर रहे हैं, फिर क्यों अधिकारी इस बात पर अड़े हुए हैं कि उसका रेप नहीं हुआ था?

पीड़िता के भाई और पिता उसे घायल अवस्था में चंदपा पुलिस स्टेशन लेकर गए थे। 48 सेकंड के वीडियो में लड़की को नीचे लेटे हुए देखा जा सकता है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी ऑफ़ कैमरा सवाल पूछ रहा है।

लड़की की गर्दन, चेहरे और हाथों पर घातक ज़ख़्मों के निशान देखे जा सकते हैं और वह काफ़ी पीड़ा झेल रही है। वह बहुत ही मुश्किल से बोल पा रही थी, जिसके बारे में बाद में पता चला कि उसकी ज़बान पर भी एक बड़ा कट था।

वह पुलिस अधिकारी को बताती है कि हमलावरों ने उसका गला घोंटने की कोशिश की, पुलिसवाले ने पूछा कि क्यों? तो उसने कहाः क्योंकि मैं उसे ज़बरदस्ती करने नहीं दे रही थी।

पीड़ित लड़की एक दूसरे वीडियो में भी यही बात दोहराती हुई देखी जा सकती है, जिसे ज़िला अस्पताल में पहले वीडियो के कुछ घंटे बाद ही रिकॉर्ड किया गया था। यहां तक कि वह एक सवर्ण जाति के हिंदू आरोपी का नाम तक बताती है।

ग़ौरतलब है कि पीड़िता एक दलित थी, जिन्हें आज भी सवर्ण जाति के हिंदू, अछूत मानते हैं। पिछले साल भारत में रोज़ाना औसतन 10 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। उत्तर प्रदेश में किसी भी राज्य की तुलना में महिलाओं के साथ अधिक हिंसा के मामले सामने आते हैं।

पुलिस ने दावा किया है कि पीड़ित लड़की ने अपने साथ मारपीट के 9 दिन बाद यानी 22 सितम्बर तक बलात्कार का आरोप नहीं लगाया था। हालांकि घटना के कुछ ही घंटों के बाद के वीडियो फ़ुटेज से स्पष्ट है कि वह दो बार अपने साथ "ज़बरदस्ती" होने की बात कहती है, जो गांवों में बलात्कार के लिए इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है।

इसके अलावा, अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ की रिपोर्ट में लड़की के साथ बल प्रयोग होने और उसका बलात्कार होने की पुष्टि की गई है।

उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर आरोप है कि उसने पीड़ित लड़की की मौत के बाद, उसके शव को परिजनों के सुपुर्द नहीं किया और आधी रात में उनकी ग़ैर-मौजूदगी में जला दिया। पुलिस और राज्य सरकार पर आरोप है कि इस तरह से उसने आरोपियों को बचाने और सुबूत मिटाने की नाकाम कोशिश की है।

पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें इंसाफ़ दिलाने का वादा करने वाले विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने बीबीसी की इस रिपोर्ट को ट्विटर पर शेयकर करते हुए अपने ट्वीट में दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों के साथ होने वाले अमानवीय बर्ताव की कड़ी निंदा की है।

गांधी का कहना है कि एक शर्मनाक सच्चाई यह है कि कई भारतीय, दलितों, मुसलमानों और आदिवासियों को इंसान ही नहीं मानते हैं। मुख्य मंत्री और उनकी पुलिस का कहना है कि रेप हुआ ही नहीं है, इसलिए कि उनके और कई लोगों के लिए वह (दलित पीड़िता) कुछ है ही नहीं।