वर्ष 2015 में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ हुए ईरान के परमाणु समझौते से अमरीका मई 2018 में बाहर निकल गया था और उसने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए थे।
यदीऊत अहारोनोत अख़बार को इंटरव्यू देते हुए जनरल शालोम ने कहा कि प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने हिज़्बुल्लाह के जिस मिसाइल गोदाम का पर्दाफ़ाश किया उसका पता अमान ने ही लगाया था और यह बहुत बड़ी कामयाबी थी जिसने हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह को असमंजस में डाल दिया कि इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसियों के हाथ बहुत लंबे हैं।
इस्राईली जनरल को यह लग रहा है कि उनकी जासूसी का असर यह हुआ है कि हिज़्बुल्लाह ने सटीक निशाना लगाने वाले मिसाइलों का निर्माण रोक दिया है या इसकी गति कम कर दी है। उनको यह भी लग रहा है कि हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह पर इस समय भारी आंतरिक दबाव है कि वह हथियारों को नष्ट कर दें।
जनरल शालोम का कहना है कि हिज़्बुल्लाह, हमास और जेहादे इस्लामी की ताक़त का स्रोत ईरान ही है और जैसे जैसे ईरान की ताक़त बढ़ती जाएगी इन संगठनों की शक्ति में भी विस्तार होता जाएगा।
हालांकि नेतनयाहू के दावे के बाद हिज़्बुल्लाह ने उस इमारत के दरवाज़े मीडिया के लिए खोल दिए थे और वहां के दृश्य लाइव दिखाए गए थे जिसका नतीजा यह निकला कि नेतनयाहू का का एक और झूठ सारी दुनिया के सामने आ गया।
पर्यवेक्षक कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में नेतनयाहू से ज़्यादा जनरल शालोम की बेइज़्ज़ती हुई क्योंकि इस प्रकार के स्ट्रैटेजिक ठिकानों की खोज जनरल शालोम के विभाग का काम है। चूंकि उन्हें इस्राईल का नेशनल स्ट्रैटेजिक पर्यवेक्षक माना जाता है इसलिए उनसे इतनी बड़ी ग़लती होने का मतलब यह है कि इस्राईल के बेहद संवेदनशील विभाग भी भयानक ग़लतियां कर रहे हैं।
इस समय जब इस्राईल ख़ुद को बड़े दुशमनों से घिरा हुआ देख रहा है तो एसे में संवेदनशील संस्थाओं की ग़लतियां इस्राईल के लिए घातक हैं।
स्रोतः रायुल यौम+एजेंसियां