7 अक्टूबर 2020 - 19:06
जर्मनी में भी जनरल सुलैमानी की ताक़त का डंका बजा, सरकारी टेलीवीजन पर प्रसारित हुई डाक्युमेंट्री...

जर्मनी के एक चैनल ने जनरल क़ासिम सुलैमानी के बारे में डाक्युमेंट्री फ़िल्म प्रसारित की और उन्हें मध्यपूर्व का बेहतरीन रणनीतिकार क़रार दिया।

इस डाक्युमेंट्री फ़िल्म में कहा गया है कि जनरल सुलैमानी हालिया दश्क में ईरान के क्षेत्र के शक्तिशाली और अहम शख़सियत थे लेकिन उनकी हत्या के बाद भी ईरान को कमज़ोर नहीं किया जा सका।

जर्मनी के सरकारी टेलीवीजन चैनल-2 ज़ेडडीएफ़ ने सोमवार को एक डाक्युमेंट्री फ़िल्म प्रसारित की जिसमें जनरल क़ासिम सुलैमानी की क्षमताओं, शक्तियों विशेषताओं और उनकी हत्या के विषय पर प्रकाश डाला गया।

इस डाक्युमेंट्री फ़िल्म में जनरल क़ासिम सुलैमानी की गतिविधियों को क्रांति के बाद फ़ोटो आर्काइव के रूप में दिखाया गया है। इस डाक्युमेंट्र फ़िल्म में दिखाया गया है कि जनरल क़ासिम सुलैमानी, मध्यपूर्व के एक शक्तिशाली रणनीतिकार और क़ुद्स ब्रिगेड के कमान्डर हैं और एक सितारे की भांति उनका सम्मान किया जाता था।  जैसा कि सीआईए की ख़ुफ़िया रिपोर्टों में आया है कि जनरल सुलैमानी की शहादत के बाद, एक बार फिर ईरान में मुर्दाबाद के गगनभेदी नारे लगने लगे और ईरानी जनता की ओर से बदले की मांग उठने लगी।

इस डाक्युमेंट्री फ़िल्म में आया है कि जनरल सुलैमानी जवानी के समय से ही इस्लामी क्रांति के साथ थे और ईरान- इराक़ युद्ध के दौरान आईआरजीसी के कमान्डर थे, उसके बाद उन्होंने लेबनान और अफ़ग़ानिस्तान में अपनी गतिविधियां बढ़ाई और अंत में एक बार फिर इराक़ के मैदाने जंग में कूद पड़े।

वह अंतिम सांसों तक इराक़ में दाइश से लोहा लेते रहे और अपनी रक्षा गतिविधियों के दौरान ईरान के मुख्य दश्मनों इस्राईल और सऊदी आतंकी गुट से लोहा लेते रहे।

जर्मनी की एसडब्ल्यूपी संस्था के निदेशक फ़ोलकर प्रिट्ज़ ने जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या की अमरीकी कार्यवाही के बारे में कहा कि ईरान के लिए जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या बहुत कठिन थी, वास्तव में यह अमरीका की ओर से ईरान से खुली जंग का एलान था। यद्यपि अमरीका ने अब तक बहुत सी जंगों और झड़पों के बारे में बताया है किन्तु जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या, आधिकारिक रूप से ईरान से जंग का एलान थी। यही वजह है कि ईरान के नेता ने फ़ौरन ही बदला लेने का कड़ा संदेश दिया।

इस डाक्युमेंट्री में जनरल क़ासिम सुलैमानी के परिजनों से वरिष्ठ नेता की मुलाक़ात, विदेशमंत्री के बयान और उनकी शवयात्र और दफ़नाने का दृश्य भी दिखाया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था।

फ़ोलकर प्रिट्ज़ कहते हैं कि ईरान ने एक महत्वपूर्ण शख़्स खो दिया लेकिन कमज़ोर नहीं हुआ, ईरान के सारे बुद्धिजीवी एक साथ हो गये और उन्होंने जनरल क़ासिम सुलैमानी की कार्यवाहियों का समर्थन किया।

इस डाक्युमेंट्री में दिखाया गया कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या का ईरान ने जवाब दिया और इराक़ में अमरीकी छावनी को निशाना बनाया। यह मीज़ाइलें ईरान का गर्व और उसका फ़ख़्र हैं।