रविवार को अल-अरबिया से बात करते हुए आज़रबाइजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीओव ने कहाः यहां कोई विद्रोही नहीं है, हमारे पास ख़ुद एक लाख सैनिकों की सेना है। मैं मांग करता हूं कि फ़्रांस को माफ़ी मांगनी चाहिए और अपनी ज़िम्मेदारी दिखानी चाहिए।
ग़ौरतलब है कि पिछले हफ़्ते, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैंक्रॉन ने यह दावा करके ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरी थीं कि उनके पास ऐसी विश्वसनीय जानकारी है, जिससे पता चलता है कि कुछ सीरियाई विद्रोही, तुर्की के रास्ते से नागोर्नो-क़रबाग़ ले जाए गए हैं।
आर्मेनिया ने भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाए थे, जिसकी सेना पड़ोसी देश आज़रबाइजान के ख़िलाफ़ विवादित पहाड़ी क्षेत्र में भीषण लड़ाई में व्यस्त है।
आर्मेनिया के प्रधान मंत्री ने सीधे तौर पर तुर्की पर भाड़े के लड़ाकों को आज़रबाइजान की ओर से लड़ने के लिए तैनात करने का आरोप लगाया था। हालांकि बाकू ने इस तरह के दावों को झूठा बताते हुए ख़ारिज कर दिया है और इसे युद्ध में अपने ख़िलाफ़ एक चाल क़रार दिया है।
आज़री अधिकारियों का कहना है कि उनके पास एक बड़ी और शक्तिशाली सेना है, इसलिए उन्हें अपने दुश्मन से निपटने के लिए भाड़े के सैनिकों की ज़रूरत नहीं है। राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार हिकमत हाजीओव का कहना था कि आज़रबाइजान को किसी मदद के लिए किसी की ज़रूरत नहीं है।
उन्होंने कहाः 1 करोड़ की आबादी वाले राष्ट्र के पास काफ़ी साधन हैं और लड़ने के लिए रिज़र्व में भी बड़ी संख्या में सैनिक हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तुर्की हमारा खुलकर समर्थन ज़रूरत कर रहा है, लेकिन लड़ाई में वह शामिल नहीं है।
वहीं अंकारा ने भी आर्मेनिया के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए सीरियाई विद्रोहियों को भेजने के आरोपों का खंडन किया है।
27 सितम्बर से विवादित क्षेत्र को लेकर आज़रबाइजान और आर्मेनिया के बीच भीषण झड़पें जारी हैं और दोनों ही देश एक दूसरे पर मिसाइल और बम बरसा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क़राबाग़ को आज़रबाइजान का क्षेत्र माना जाता है, जिसे आर्मेनिया के क़ब्ज़े से वापस लेने के लिए वह आरपार की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।