इससे यह बात भी सामने आई कि फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रां और उनके सलाहकारों को लेबनान के राजनैतिक हालात और मुख्य खिलाड़ियों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
अगर फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रां की अज्ञानता का यह हाल है तो हम केवल उनकी निंदा नहीं करते बल्कि लेबनानी फ़ोर्सेज़ की भी आलोचना करते हैं ख़ास तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी की निंदा की जानी चाहिए जिन्होंने लेबनान के संविधान का भी उल्लंघन किया।
यह बात सही है कि लेबनान में इस समय कठिन हालात हैं मगर इन हालात में तो और भी ज़रूरी हो जाता है कि बीच का रास्ता निकाला जाए और सारे व्यक्तिगत व दलगत हितों को नज़रअंदाज़ करके राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी जाए।
सैयद हसन नसरुल्लाह से मिलने वाली इस जानकारी से बहुत दुख हुआ कि निवर्तमान प्रधानमंत्री मुसतफ़ा अदीब ने राजनैतिक दलों से सरकार गठन के विषय पर कोई बात ही नहीं की बल्कि उनकी तरफ़ से सारी बातचीत सअद हरीरी कर रहे थे जिनके दल को संसद में बहुमत हासिल नहीं है। उन्होंने केवल मंत्रालयों और क़लमदानों के बंटवारे के बारे में चर्चा की।
अमरीका और फ़्रांस का आरोप है कि हिज़्बुल्लाह इस समय लेबनान का कंट्रोल अपने हाथ में ले चुका है और वह सरकार के भीतर अपनी अलग सरकार चलाता है। तो सवाल यह है कि जब हिज़्बुल्लाह के पास इतना राजनैतिक प्रभाव है तो उसे नज़रअंदाज़ करने और हाशिए पर डालने की कोशिश क्यों की जाती है। सैयद हसन नसरुल्लाह के बारे में सब जानते हैं कि वह कभी झूठ नहीं बोलते। यहां तक कि सर्वे रिपोर्टों के अनुसार इस्राईल में रहने वाले 92 प्रतिशत लोग भी यह कहते हैं कि सैयद हसन नसरुल्लाह सच्चे इंसान हैं वहीं 95 प्रतिशत इस्राईलियों का मानना है कि इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू पक्के झूठे व्यक्ति हैं।
नेतनयाहू का एक बड़ा झूठ तो मंगलवार की रात को सारी दुनिया ने टीवी के स्क्रीन पर देखा जब हिज़्बुल्लाह ने पत्रकारों की पूरी भीड़ उस कारखाने में पहुंचा दी जिसके बारे में नेतनयाहू ने तसवीरें दिखाकर दावा किया था कि वहां हिज़्बुल्लाह ने मिसाइलों का भंडार बना रखा है।
लेबनान के राजनैतिक दलों के लिए यह समझने की बात है कि वह हिज़्बुल्लाह को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। वह बड़ी राजनैतिक ताक़त है तो सरकार में भी उसका बड़ा हिस्सा होना तय है। सैयद हसन नसरुल्लाह ने बिल्कुल सही कहा कि सरकार में उनके मंत्रियों का एक ही काम होता है कि प्रतिरोधक फ़ोर्स को बचाना और देश को बेचने की अनुमति न देना वरना लेबनान के राजनैतिक मंच पर कुछ ताक़तें एसी हैं जो विदेशी क़र्ज़ा अदा करने के बजाए देश को ही बेच दें।
वह लोग मौजूद हैं जिन्होंने लेबनान की अरबों डालर की संपत्ति इस देश से बाहर पहुंचा दी और एक बड़ी आबादी को ग़रीबी रेखा के नीचे ढकेल दिया। यह लोग मौक़ा मिल जाए तो लेबनान को बेचने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएंगे। इन अरबपतियों में कौन है जिसने अपनी संपत्ति से एक डालर का भी दान दिया हो और लेबनान की आर्थिक समस्या हल करने की कोशिश की हो।
सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण का सबसे ख़ूबसूरत वाक्य वह था जिसमें उन्होंने कहा कि हम मैक्रां को जज, शासक और मालिक नहीं मानेंगे उन्हें चाहिए कि वह लेबनानियों से विशेष रूप से प्रतिष्ठित लोगों से इज़्ज़त से पेश आना सीखें।
सैयद हसन नसरुल्लाह की एक ही समस्या है कि वह बड़े पवित्र इंसान हैं मगर उस माहौल में हैं जहां भ्रष्टाचारियों की भरमार है, ईश्वर उनकी मदद करे।
अब्दुल बारी अतवान
अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार