29 सितंबर 2020 - 14:06
सऊदी अरब ने लगाए तुर्की पर प्रतिबंध, तुर्क उत्पादों के बहिष्कार की घोषणा

पिछले कई महीनों से स्थानीय कंपनियों पर तुर्क कंपनियों के साथ व्यापार नहीं करने के लिए दबाव डालने के बाद, अब सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से तुर्की के उत्पादों के बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

तुर्की के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के ख़ुफ़िया प्रतिबंधों के बाद इस हफ़्ते से आधिकारिक रूप से इन प्रतिबंधों का एलान कर दिया गया है, ताकि मद्दी का शिकार तुर्की की अर्थव्यस्था को अधिक नुक़सान पहुंचाया जा सके।

एक तुर्क व्यापारी ने तुर्की के अख़बार जमहूरियत से बात करते हुए कहा है कि हमारे सऊदी ग्राहक, तुर्की के उत्पदों का इस्तेमाल करते रहे हैं, वे संतुष्ट भी हैं। लेकिन अब वे हमारे उत्पाद नहीं ख़रीद सकेंगे।

ग़ौरतलब है कि सऊदी शासन पहले से ही स्थानीय व्यापारियों पर तुर्की के साथ व्यापार नहीं करने के लिए दबाव बना रहा था।

तुर्क अधिकारियों का कहना है कि सऊदी अधिकारी ताज़ा सब्ज़ियां और फल ले जाने वाले ट्रकों को अपनी सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहे थे।

सऊदी अरब ने देश में काम करने वाले उच्च श्रेणी के तुर्क नागरिकों के रोज़गार अनुबंध को भी रद्द कर दिया है।

तुर्की, डब्ल्यूटीओ में सऊदी अरब की शिकायत करने पर विचार कर रहा है, और वह मुआवज़े की मांग कर सकता है।

तुर्की, सऊदी अरब को अपने उत्पाद निर्यात करने वाला एक प्रमुख देश है। 2018 में तुर्की ने सऊदी अरब को 2.64 बिलियन डॉलर का निर्यात किया था।

पिछले कुछ वर्षों से क्षेत्र में हितों के टकराव को लेकर तुर्की और सऊदी अरब समेत कुछ अरब देशों के रिश्तों में काफ़ी कड़वाहट देखने को मिल रही है।

अक्तूबर 2018 में रियाज़ और अंकारा के रिश्ते उस वक़्त और ख़राब हो गए, जब इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसुलेट में वाशिंगटन पोस्ट के लिए लिखने वाले सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की निर्मन हत्या कर दी गई।

इसके अलावा, सऊदी घटक द्वारा क़तर की घेराबंदी और लीबिया संघर्ष में विरोधी गुटों के समर्थन जैसे मुद्दों के कारण भी, तुर्की और फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों के बीच तनाव उत्पन्न है।