इस्राईली प्रधानमंत्री के सलाहकार ईदी कोहन ने कहा है कि अरबों को " पलायनकर्ता" यहूदियों को हर्जाना देना चाहिए।
ईदी कोहन ने रूसियाअलयौम टीवी चैनल से एक वार्ता में बताया कि इस्राईल में एक गुप्त समिति ने तीस साल पहले एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें अरब देशों में यहूदियों की संपत्ति का लेखा जोखा है और यह रिपोर्ट इस्राईली सरकार को दे दी गयी है।
रिपोर्ट के अनुसार अरब देशों में ज़ब्त की गयी यहूदियों की संपत्ति 200 अरब डॉलर से अधिक है।
नेतेन्याहू के सलाहकार ने टीवी कार्यक्रम में कहा कि दसियों हज़ार अरब यहूदी अपनी संपत्ति वापस चाहते हैं जिन पर अरब सरकारों ने क़ब्ज़ा कर लिया है जैसे मिस्र, इराक़, लीबिया, सीरिया, अल्जीरिया और ट्यूनेशिया आदि देशों में यहूदियों की संपत्ति पर सरकार का कब्ज़ा है।
नेतेन्याहू के सलाहकार ईदी कोहन ने कहा कि जमाल अब्दुन्नासिर ने स्वेज युद्ध के दौरान मिस्र के यहूदियों का 70 अरब डॉलर हड़प लिया इसी तरह मिस्र ने सन 1967 के युद्ध में यहूदियों की संपत्ति पर क़ब्ज़ा कर लिया, इसी तरह इराक़ में भी हुआ और अल्जीरिया में भी।
कार्यक्रम में जब एंकर सलाम मुसाफिर ने नेतेन्याहू के सलाहकार ईदी कोहन से पूछा कि क्या इस्राईल, फिलिस्तीनी पलायनकर्ताओं को हर्जाना देगा? हो सकता है आप और आप के कई दोस्त और रिश्तेदार, इस्राईल में किसी फिलिस्तीनी के घर में रह रहे हों तो वह मुस्काराते रहे।
इस कार्यक्रम के बाद अरब जगत में सोशल मीडिया पर हलचल शुरु हो गयी और लोग बेहद गुस्से में नज़र आए।
मिस्र के एक नागरिक ने ट्विटर पर ईदी कोहन से पूछा है कि आप यह बताएं कि फिलिस्तीनियों की जिस भूमि पर क़ब्ज़ा कर रखा है उसका हर्जाना कितना देंगे? जितने फिलिस्तीनियों को मारा है और जितनों को वहां से भगाया है उनका हर्जाना कितना होगा? उन युद्धों का हर्जाने का हिसाब भी बताएं जो आप ने छेड़े हैं।
एक ने ट्वीट किया है तुम लोगों को सच में शर्म नहीं आती। पूरे फिलिस्तीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है और उसके बाद अरब सरकारों से हर्जाना भी चाहिए? यहूदी अपनी इच्छा से अरब देशों को छोड़ कर इस्राईल गये हैं किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया।
एक फिलिस्तीनी ने लिखा हैः तुम लोग मेरी भूमि पर मेरे घर में रहते हो पहले मेरे घर से निकलो हर्जाना दो फिर बात करो।
ईदी कोहन इससे पहले भी अरब जगत में अपने बयानों की वजह से चर्चा में रह चुके हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि अरब तानाशाही का अंत हो गया है। इसी तरह कहा था कि अगर सद्दाम जीवित होते तो पूरी फार्स की खाड़ी पर उनका क़ब्ज़ा होता और यूएई और बहरैन के साथ इस्राईल के संबंध नहीं बन पाते।