ओईसीडी द्वारा नए आर्थिक अनुमानों के मुताबिक़, 2020 में दक्षिण कोरिया की जीडीपी को सिर्फ़ 1 प्रतिशत का नुक़सान हो रहा है, यानी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में चीन के बाद वह दूसरा ऐसा देश है, जो सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। जबकि यूरोप की अर्थव्यवस्था को 8 प्रतिशत तक और अमरीका की जीडीपी को क़रीब 4 प्रतिशत का नुक़सान हो सकता है।

ओईसीडी के मुख्य अर्थशास्त्री लॉरेंस बूने का कहना है कि दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के बाद से, सबसे नाटकीय आर्थिक मंदी का सामना कर रही है।
अमरीका और दक्षिण कोरिया ने एक ही दिन में कोरोना वायरस का पहला मामला दर्ज किया था, उसके बाद दक्षिण कोरिया में मार्च में एक दिन में सबसे ज़्यादा 851 मामले सामने आए, जबकि अमरीका में जुलाई के मध्य तक एक ही दिन में 74,818 नए मामलों की पुष्टि की गई थी। दक्षिण कोरिया में प्रति 10 लाख लोगों पर सात मौतें हुईं, तो वहीं अमरीका प्रति मिलियन लगभग 600 मौतें दर्ज की गई हैं।
ओईसीडी में दक्षिण कोरिया के वरिष्ठ अर्थशास्त्री क्रिस्टोफ़ आंद्रे का कहना थाः इसका मुख्य कारण यह है कि दिक्षिण कोर्या ने महामारी को दूसरों की तुलना में, बेहतर ढंग से निंयत्रित किया है, जिसकी वजह से आर्थिक गतिविधियों में कम रुकावटें पेश आई हैं।
इसके अलावा, भले ही दक्षिण कोरिया में अन्य देशों की तरह महामारी का प्रकोप व्यापक नहीं था, लेकिन उसने तुरंत व्यवसायों और नागरिकों की जेब में लगभग 12.2 बिलियन डॉलर, या देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 प्रतिशत डालकर, काफ़ी आक्रामक वित्तीय प्रतिक्रिया दी।

हालांकि यह जर्मनी जैसे देशों की तुलना में बड़ी नहीं थी, जिसने जीडीपी का लगभग 4 प्रतिशत प्रोत्साहन पैकेज के रूप में निर्धारित किया था, लेकिन सियोल की शीघ्र प्रतिक्रिया ने अर्थव्यस्था को मज़बूत सहारा दिया। इसने खपत को बनाए रखने में मदद की। दक्षिण कोरिया क़र्ज़ के रूप में 230 बिलियन डॉलर की कुल गारंटी देकर, लगातार सहायता प्रदान कर रहा है।
अन्य देशों की तुलना में दक्षिण कोरिया ने तेज़ी से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई अहम क़दम उठाए। सबसे पहले अधिक से अधिक व्यवसायों को खोला गया, ताकि लोग सहायता के रूप में प्राप्त होने वाली नक़दी को ज़्यादा से ज़्यादा ख़र्च कर सकें। यही हुआ भी, दक्षिण कोरियाई उपभोक्ताओं ने अधिक पैसे ख़र्च किए और कम बचत की। पहले तीन चरणों में वितरित धन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दक्षिण कोरियाई उपभोक्ताओं ने ख़र्च किया।
कुछ दक्षिण कोरियाई प्रांतों ने भी रचनात्मक समाधानों का इस्तेमाल किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकार की ओर से वितरित की जाने वाली नक़दी, अर्थव्यवस्था में शामिल हो सके और उससे खपत को बढ़ावा देने में मदद मिल सके।
देश के सबसे अधिक आबादी वाले ग्योंगिगी प्रांत के गवर्नर ली जे-म्युंग ने, ग़ैर-नक़द भुगतान का फ़ैसला किया। प्रत्येक नागरिक को क़रीब 85 डॉलर की क़ीमत के कूपन दिए गए, जिसे तीन महीने की अवधि में ख़र्च किया जा सकता था।
इससे खपत में वृद्धि करने और अर्थव्यवस्था के लिए अधिक ख़र्च करने का एक चक्र बनाने में मदद मिली। इसीलिए यह देश अन्य देशों की तुलना में बड़े आर्थिक झटकों से किसी हद तक सुरक्षित रहा है।