इस बयान के बाद ईरान की तरफ़ से फ़ौरन जवाब आया और संसद सभापति के विशेष सलाहकार हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियान ने कहा कि जब से संयुक्त अरब इमारात ने इस्राईल के साथ अपने संबंधों की घोषणा की है तब से अगर ईरान में मोसाद और उसके एजेन्टों की कोई भी खुली या ख़ुफ़िया कार्यवाही होती है उसका करारा जवाब दिया जाएगा और यह जवाब केवल इस्राईल तक ही सीमित नहीं होगा, यूएई को भी इसका जवाब दिया जाएगा।
संयुक्त अरब इमारात को श्री अब्दुल्लाहियान की बात पर एतेराज़ करने और उसकी निंदा करने का हक़ भी नहीं है क्योंकि उसके स्वामियों ने अबूधाबी और तेल अवीव के बीच संबंधों का लक्ष्य ईरान के विरुद्ध सैन्य और सुरक्षा गठबंधन बनाना क़रार दिया है। ईरान इस गठबंधन के मुक़ाबले में हाथ पर हाथ धरे बैठा नहीं रहेगा, अगर इमारात को इस बयान पर एतेराज़ करना है तो उसे अमरीका के जल्दबाज़ी में दिए गये उस बयान पर आपत्ति करना चाहिए।
ईरान को पता है कि संयुक्त अरब इमारात, इस्राईल के साथ अपने संबंधों को उजागर करने पर मजबूर हुआ है और यह यह काम बिन ज़ाएद के बस में होता तो वह अपने शीशे की सरकार और देश की ख़राब आर्थिक स्थिति को बचाने के लिए इस्राईल के साथ अपने गुप्त संबंधों को ही जारी रखते लेकिन इस आदमी की इस्राईल और अमरीका के आगे कुछ भी नहीं चलती।
ईरान के संसद सभापति के सलाहकार ने कहा कि इमारात, इस्राईल के साथ जो भी सांठगांठ करेगा, वह अपनी ही सुरक्षा ख़तरे में डालेगा क्योंकि इस्राईली जहां पर घुसते हैं, असुरक्षा साथ ले जाते हैं।
दूसरी ओर उन्होंने फ़ार्स की खाड़ी और क्षेत्र से ऊर्जा के स्थानांतरण की सुरक्षा को ख़तरे में डाल दिया है। संयुक्त अरब इमारात ने अपनी इस करतूत से ईरान सहित अपने सारे पड़ोसियों की सुरक्षा ख़तरे में डाल दी है।
इस बात में कोई शक नहीं है कि इस्राईल और संयुक्त अरब इमारात के बीच सांठगांठ की पहली ज़रूरत अमरीका को और दूसरे नंबर पर इस्राईल को है और संयुक्त अरब इमारात को इससे कोई भी लाभ होने वाला नहीं है और इस बात की सच्चाई, संयुक्त अरब इमारात के साथ इस्राईली अधिकारियों की बातचीत से ही पता लगाया जा सकता है।
श्री अब्दुल्लाहियान ने कहा कि इमारात को यह नहीं भूलना चाहिए कि नेतेनयाहू ने इस प्रक्रिया के दौरान उनका कितना अपमान किया मानो यूएईए, इस्राईल की ही एक बस्ती हो और आज उनके द्वारा उसका अनावरण हुआ। यही अपमान, बिन ज़ाएद ने जनता और क्षेत्र के लिए हासिल किया है।
श्री अब्दुल्लाहियान ने अपनी बातचीत में इस बात की ओर सचेत किया कि संयुक्त अरब इमारात सात हिस्सों में बंट जाएगा, यह योजना केवल इमारात के लिए ही नहीं बल्कि सऊदी अरब के लिए भी बनाई जा चुकी है।