डॉन न्यूज़ के अनुसार बलवीर एस नामक भारतीय पर अपने देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिए सिख समुदाय और कश्मीरी कार्यकर्ताओं की जासूसी करने का आरोप है। 54 वर्षीय अभियुक्त पर कम से कम पांच साल से अपने देश की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। प्रॉसिक्यूटर का कहना है कि बलवीर ने जर्मनी में सिखों और कश्मीरियों के मूवमेंट और उनके रिश्तेदारों के बारे में सूचनाएं प्राप्त कीं और उन्हें फ़्रेंकफ़र्ट में भारतीय वाणिज्य दूतावास तक पहुंचाया। न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई के लिए दस दिन का समय दिया है और 29 अक्तूबर को इस मुक़द्दमे की अंतिम सुनवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि इसी अदालत ने पिछले साल दिसम्बर में एक भारतीय जोड़े को भी सिखों व कश्मीरियों की जासूसी में दोषी क़रार दिया था और पति को 18 महीने क़ैद की सज़ा सुनाई थी जबकि पत्नी पर उसकी मदद करने के लिए छः महीने तक मज़दूरी करने का जुर्माना लगाया था। फ़्रेंकफ़र्ट में सिख समुदाय के दस से बीस हज़ार लोग रहते हैं और किसी भी यूरोपीय क्षेत्र में यह सबसे अधिक है।