शनिवार को टीवी पर प्रसारित होने वाली कैबिनेट की बैठक के दौरान, मादुरो ने मज़ाक़िया अंदाज़ में अपने रक्षा मंत्री व्लादिमिर पैडरिनो से कहा था कि ईरान से मिसाइल ख़रीदने का आइडिया, बढ़िया है और इस बात को राज़ में ही रखा जाए।
दर असल, इससे एक दिन पहले कोलम्बियाई राष्ट्रपति इवान दुके ने दावा किया था कि मादुरो ईरान से मिसाइल ख़रीदने का प्रयास कर रहे हैं।
दुके के इस बयान पर प्रतिक्रिया जताते हुए मादुरो ने कहाः पैडरिनो कितना बढ़िया आइडिया है, ईरान से बात करो और यह देखो कि उनके पास कम, मध्यम और लम्बी दूरी को कौनसे मिसाइल हैं, अगर यह संभव हो सके, क्योंकि हमारे ईरान के साथ बहुत ही अच्छे संबंध हैं।
कोलम्बियाई राष्ट्रपति के दावे पर मादुरो के कटाक्ष को अमरीकी विदेश मंत्री पोम्पियो ने कुछ ज़्यादा ही गंभीर ले लिया और बुधवार को ट्वीट कियाः क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि मादुरो का अवैध प्रशासन, ईरान से विनाशकारी हथियार ख़रीदने का प्रयास कर रहा है। इसी वजह से हम ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र के हथियारों के प्रतिबंध समेत सबी प्रतिबंधों की बहाली का प्रयास कर रहे हैं। हम इन प्रतिबंधों को पूर्ण रूप से लागू करेंगे।
ईरान और विश्व की 6 शक्तियों के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते के मुताबिक़, 18 अक्तूबर को ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र के हथियारों के प्रतिबंध समाप्त हो जायेंगे।
अमरीका ने 2018 में इस समझौते से निकलने का एलान कर दिया था। अब उसका प्रयास है कि ईरान के ऊपर से यह प्रतिबंध नहीं हटे। इसके लिए उसने 14 दिसम्बर को सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव रखा था, जिसके पक्ष में केवल एक वोट हासिल हुआ और वाशिंगटन को बुरी तरह अपमान झेलना पड़ा।
उसके बाद वाशिंगटन ने परमाणु समझौते के स्नैपबैक तंत्र के प्रयोग का दावा करते हुए सुरक्षा परिषद से ईरान के ख़िलाफ़ समस्त प्रतिबंधों की बहाली की मांग की है, जिसे सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष इंडोनेशिया ने ख़ारिज कर दिया है।
अमरीका अपने इस प्रयास में अलग-थलग पड़ गया है, यहां तक कि उसके पारम्परिक सहयोगी यूरोप ने भी उसके ग़ैर क़ानूनी क़दम का समर्थन करने से इनकार कर दिया है।