इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली खामेनई ने 19 अगस्त सन 1953 के लज्लाजनक विद्रोह की वर्षगांठ के अवसर पर सोशल मीडिया पर अपने एक संदेश में कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने देश के मुख्य विभागों में अमरीका की फिर से घुसपैठ करने और पैठ बनाने की राह बंद कर दिया है और वार्ता से दूरी, अमरीका की राह बंद करने का साधन है जो निश्चित रूप से अमरीका के लिए बेहद कठिन है।
19 अगस्त सन 1953 में अमरीका व ब्रिटेन की मिलीभगत से होने वाले एक षडयंत्र के बाद ईरान की तत्कालीन कानूनी सरकार को गिरा दिया गया था।
यह विद्रोह ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से पूर्व ईरान के इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण कालखंड है।
यह विद्रोह, ईरान में अमरीका व ब्रिटेन के हस्तक्षेप और तेल के उद्योग पर वर्चस्व के प्रयास का एक हिस्सा था और उस समय हुआ जब अंतरराष्ट्रीय हेग न्यायालय ने ईरान व ब्रिटेन के मध्य तेल के समझौते के विवाद में ईरान के हित में फैसला दिया था।
हालिया वर्षों में कुछ एेसे दस्तावेज़ जारी हुए जिनमें अमरीकी अधिकारियों ने ईरान में 19 अगस्त सन 1963 के विद्रोह में अमरीका और ब्रिटेन की भूमिका को स्वीकार किया है।