हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले राजीव महर्षि का कहना है कि रक्षा ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड नहीं करने का उद्देश्य यह है कि लोग इसे आसानी से प्राप्त न कर सकें।
हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि यह उनका ख़ुद का निर्णय हैं, न कि मोदी सरकार का। जबकि सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय मोदी सरकार का ही है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, महर्षि का कहना था कि संसद को हम यह रिपोर्ट दे रहे हैं। वास्तव में यह गोपनीय नहीं है। लेकिन कम से कम हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि एक क्लिक में इसे प्राप्त नहीं किया जा सके। क्योंकि इसे कोई वॉशिंगटन, बीजिंग और इस्लामाबाद में भी देख सकता है।
राजीव महर्षि का कहना था कि जब मैं गृह मंत्रालय में था तो उस समय पाकिस्तान के साथ विवाद चल रहा था। तब कैग की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें हथियारों की कमी का उल्लेख किया गया था।
मालूम हो कि पूर्व गृह सचिव महर्षि को सितंबर 2017 में कैग नियुक्त किया गया था। वेबसाइट पर अपलोड की गई आख़िरी रक्षा ऑडिट रिपोर्ट उनके कैग बनने से पहले की है, जो कि 28 जुलाई 2017 में संसद में पेश की गई थी।